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साल 2018 : बैडमिंटन कोर्ट पर महिला खिलाडिय़ों का रहा दबदबा

khaskhabar.com : सोमवार, 31 दिसम्बर 2018 3:22 PM (IST)
साल 2018 : बैडमिंटन कोर्ट पर महिला खिलाडिय़ों का रहा दबदबा
श्रीकांत पुरुष वर्ग में अंतिम-32 दौर में ही बाहर हो गए, वहीं प्रणॉय भी इसी दौर तक हाथ आजमा सके। दोनों को ही बिना पदक के लौटना पड़ा। भारतीय खिलाडिय़ों के लिए अहम रहने वाले सैयद मोदी अंतर्राष्ट्रीय टूर्नामेंट में समीर वर्मा ने खिताबी जीत हासिल कर साल का सकारात्मक रूप से समापन करने में सफलता पाई। समीर ने फाइनल में चीन के ली ग्वांगझू को हराकर खिताबी जीत हासिल की।

इस टूर्नामेंट में श्रीकांत हिस्सा नहीं ले सके, वहीं प्रणॉय अंतिम-32 दौर और प्रणीत क्वार्टर फाइनल तक ही पहुंच सके। महिला वर्ग में सैयद मोदी अंतर्राष्ट्रीय टूर्नामेंट में सिंधु ने हिस्सा नहीं लिया लेकिन सायना ने रजत पदक अपने नाम किया। उन्हें फाइनल में चीन की हान ये से हार मिली थी। बीडब्ल्यूएफ वल्र्ड टूर फाइनल्स में सिंधु ने खिताबी जीत हासिल की और वह इस उपलब्धि को हासिल करने वाली पहली भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी बन गईं।

साल के समापन तक उन्होंने एक नया इतिहास रचा। इस टूर्नामेंट के पुरुष वर्ग में समीर सेमीफाइनल तक का सफर तय कर पाए। इसके अलावा, श्रीकांत, प्रणॉय जैसे खिलाडिय़ों ने इसमें हिस्सा नहीं लिया। युगल वर्गो की स्पर्धाओं में भारतीय खिलाडिय़ों के प्रदर्शन पर नजर डाली जाए, तो यह मिलीजुली रही हैं। सात्विक साईंराज रैंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी की जोड़ी ऑल इंग्लैंड ओपन के पुरुष युगल वर्ग में अंतिम-16 दौर तक ही पहुंच सकी, वहीं अश्विनी पोनप्पा और एन.सिक्की रेड्डी की जोड़ी अंतिम-32 दौर तक की राह ही तय कर पाई।

राष्ट्रमंडल खेलों में सात्विक और चिराग को कांस्य पदक हासिल हुआ, वहीं अश्विनी और सिक्की की जोड़ी ने कांस्य पदक अपने नाम किया। विश्व चैम्पियनशिप में भारतीय जोडिय़ों को खाली हाथ लौटना पड़ा। एशियाई खेलों में भी इन जोडिय़ों को एक भी पदक हासिल नहीं हुआ। सैयद मोदी अंतर्राष्ट्रीय टूर्नामेंट में अश्विनी और सिक्की की जोड़ी ने रजत पदक हासिल करने में सफलता प्राप्त कही, वहीं सात्विक और चिराग की जोड़ी ने भी फाइनल में पहुंचकर रजत पदक अपने नाम किया।

इस साल जूनियर खिलाडिय़ों में लक्ष्य सेन ने अपनी पहचान बनाने में सफलता हासिल की। उन्होंने एशिया जूनियर चैम्पियनशिप में खिताबी जीत हासिल करने के बाद यूथ ओलम्पिक खेलों में पहला रजत पदक हासिल किया। विश्व जूनियर चैम्पियनशिप में वह सेमीफाइनल तक का सफर ही तय कर पाए, लेकिन उन्होंने टाटा इंडिया ओपन का खिताब जीतकर साल का सकारात्मक रूप से समापन किया।

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