CWG 2018 : gold medalist Saina Nehwal says, Will always fight for my father-m.khaskhabar.com
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सोना जीत सायना बोलीं- मैं आधे घंटे भी नहीं सो पाई, क्योंकि पापा...

khaskhabar.com : रविवार, 15 अप्रैल 2018 3:08 PM (IST)
सोना जीत सायना बोलीं- मैं आधे घंटे भी नहीं सो पाई, क्योंकि पापा...
गोल्ड कोस्ट। लंदन ओलंपिक की कांस्य पदक विजेता सायना नेहवाल ने 21वें राष्ट्रमंडल खेलों में अंतिम दिन रविवार को महिला एकल वर्ग का स्वर्ण पदक अपने नाम किया। सायना राष्ट्रमंडल खेलों में दो स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला बैडमिंटन खिलाड़ी बन गई हैं। वर्ल्ड नम्बर-12 सायना ने इससे पहले 2010 में राजधानी दिल्ली में आयोजित राष्ट्रमंडल खेलों में भी स्वर्ण पदक अपने नाम किया था। लंदन ओलंपिक की कांस्य पदक विजेता सायना ने स्वर्ण पदक के लिए खेले गए महिला एकल वर्ग के मैच में हमवतन सिंधु को 56 मिनट में 21-18, 23-21 से मात देकर राष्ट्रमल खेलों का दूसरा स्वर्ण पदक अपने नाम किया। सिधु को हार के कारण रजत पदक से संतोष करना पड़ा।

जीत के बाद सायना नेहवाल ने कहा, मुझे अपने पिताजी के लिए कहीं भी किसी से भी भिडऩे में परहेज नहीं है। लोगों का कहना है कि मैंने अपने पिता को पहले रखा लेकिन ऐसा नहीं है। अगर ऐसा होता तो मैं अपने देश के लिये पदक नहीं जीतती। उन्होंने अपने पिता को खेल गांव में प्रवेश नहीं मिलने के बारे में कहा, ‘मुझसे क्यों कहा गया कि सारी व्यवस्था कर दी गयी है जबकि ऐसा नहीं किया गया था। अगर मुझे पता होता तो मैं उनके लिए होटल में कमरा बुक करवा देती। उन्हें निजी कोच का मान्यता पत्र मिला था और लंबी यात्रा के बाद मुझे इस तरह की स्थिति से जूझना पड़ा। सायना नेहवाल ने कहा कि इससे उनका ध्यान भंग हुआ और इससे वह काफी तनाव में थी।

उन्होंने कहा, ‘दो दिन तक मैं सो तक नहीं पायी। मैं वहां तीन-चार घंटे बैठे नहीं रह सकती थी। मैं सरकारी अधिकारी नहीं हूं। मैं एक खिलाड़ी हूं। मुझे मैच खेलने होते हैं। सिंधु टीम स्पर्धा में नहीं खेल रही थी और मुझे वहां अच्छा प्रदर्शन करना था। कई बार चीजों को सामान्य होने में समय लगता है लेकिन मुझे लगता है कि अगर मैंने तब वैसा रवैया नहीं अपनाया होता तो ऐसा नहीं होता। उन्होंने कहा, ‘वह दो दिन तक खेल गांव के बाहर बैठे रहे। वह यहां तक कि डाइनिंग हॉल तक नहीं आ पाए। उनके यहां आने का क्या मतलब था। यह तनावपूर्ण स्थिति थी लेकिन आपको इससे लडऩा होता है। मुझे विश्राम की जरूरत थी। रोजर फेडरर कहता है कि वह 10-12 घंटे सोता है और मैं आधे घंटे भी नहीं सो पायी क्योंकि मेरे पिता बाहर बैठे हुए थे। मैं कैसे सो पाती।

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