UP lockdown: Wood supply at cremation ground stalled-m.khaskhabar.com
×
khaskhabar
May 30, 2020 1:45 am
Location
Advertisement

UP lockdown: श्मशान घाट में लकड़ियां हो रही हैं खत्म,इलेक्ट्रिक शवदाहगृह की शरण में

khaskhabar.com : रविवार, 05 अप्रैल 2020 5:18 PM (IST)
UP lockdown: श्मशान घाट में लकड़ियां हो रही हैं खत्म,इलेक्ट्रिक शवदाहगृह की शरण में
लखनऊ। लॉकडाउन के कारण जन्मदिन, शादियां, वर्षगांठ और अन्य समारोह तो रुक ही गए हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश में दाह संस्कार के लिए लकड़ी की कमी होने से अब अंतिम संस्कार के लिए भी इंतजार करना पड़ सकता है। राज्य की राजधानी के सबसे बड़े श्मशान घाट भैसाकुंड (जिसका नाम अब बैकुंठधाम हो गया है) में लकड़ियां खत्म हो रही हैं। यहां केवल अगले तीन दिन के लिए लकड़ियां बची हैं।
भैसाकुंड में अंतिम अनुष्ठान करने वाले कालू पंडित ने बताया कि जब से लॉकडाउन शुरू हुआ है, लकड़ी की आपूर्ति बंद हो गई है। अगर आपूर्ति सुनिश्चित नहीं की गई, तो हमें तीन या चार दिनों के बाद दाह संस्कार बंद करना पड़ सकता है।"
उन्होंने कहा कि जब बात दाह संस्कार की आती है तो उसे विधिवत तरीके से करने को लेकर लोग बहुत संवेदनशील होते हैं। ऐसे में यदि इसमें कोई बाधा आती है तो कानून और व्यवस्था की समस्या से इंकार नहीं किया जा सकता है।
भैसाकुंड में सामान्य दिनों में लगभग 15 से 20 शवों का दाह संस्कार होता है।
पुराने शहर के इलाके के निवासी अंतिम संस्कार के लिए गुलाला श्मशान घाट जाते हैं, जिसमें हर दिन लगभग 8 से 10 दाह संस्कार होते हैं।
उन्होंने कहा, "कोरोना के प्रकोप के बाद से लोग इलेक्ट्रिक शवदाहगृहों को प्राथमिकता दे रहे हैं, क्योंकि शवों के साथ आने वाले लोगों की संख्या अब छह से कम होती है। इलेक्ट्रिक शवदाहगृह ज्यादा भीड़ के लिए उपयुक्त नहीं होते।"
हालांकि गुलाला घाट पर स्थानीय पंडितों ने स्थानीय स्तर पर कुछ लकड़ी की व्यवस्था की है, लेकिन वे आपूर्ति में कमी को लेकर चिंतित हैं।
दोनों श्मशान घाटों के पंडितों ने कहा कि उन्होंने स्थानीय प्रशासन को इस समस्या के बारे में सूचित किया है लेकिन अभी तक कुछ भी नहीं किया गया है।

ये भी पढ़ें - अपने राज्य / शहर की खबर अख़बार से पहले पढ़ने के लिए क्लिक करे

1/2
Advertisement
Khaskhabar UP Facebook Page:
Advertisement
Advertisement