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यूनिवर्सल न्यूबॉर्न हियरिंग स्क्रीनिंग प्रोग्राम की शुरूआत

khaskhabar.com : सोमवार, 11 नवम्बर 2019 6:16 PM (IST)
यूनिवर्सल न्यूबॉर्न हियरिंग स्क्रीनिंग प्रोग्राम की शुरूआत
जयपुर । एस. आर. गोयल सरकारी अस्पताल में सोमवार को यूनिवर्सल न्यूबॉर्न हियरिंग स्क्रीनिंग प्रोग्राम (यूएनएचएस) शुरू किया गया। नामचीन ऑस्ट्रेलियन क्रिकेट खिलाडी ब्रेट ली, एसएमएस मेडिकल कॉलेज और संलग्न अस्पतालों के प्रिंसिपल और कंट्रोलर डॉ. सुधीर भंडारी और एस. आर. गोयल सरकारी अस्पताल के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. जगदीश सिंह ने इस प्रोग्राम का उद्घाटन किया गया। सभी नवजात शिशुओं की सुनने की क्षमता की जांच जन्म के समय ही की जानी जरुरी है यह सुनिश्चित करना इस प्रोग्राम का उद्देश्य है।

ब्रेट ली ने इस अवसर पर कहा, "सुनना हर व्यक्ति का मुलभुत अधिकार है। दैनंदिन जीवन में कई सारी आवाजें होती हैं, हर व्यक्ति को उन्हें सुनना चाहिए, उनका आनंद लेना चाहिए। सुनने में कुछ कमी हो या बहरापन हो तो दूसरों के साथ बातें करने में कठिनाइयां आती हैं। आज प्रौद्योगिकी इतनी विकसित हो चुकी है कि बहरेपन का इलाज किया जा सकता है। लेकिन सफल इलाज के लिए समस्या की पहचान होना बहुत आवश्यक है। जन्म के समय ही अगर सुनने की क्षमता की जांच करवाई जाए तो शिशु में कोई समस्या हो तो उसकी पहचान हो सकती है, तत्काल इलाज किए जा सकते हैं और आगे चलकर वह बच्चा एक आम, खुशहाल जीवन जी सकता है। एस. आर. गोयल सरकारी अस्पताल में आज इस हियरिंग स्क्रीनिंग प्रोग्राम की शुरूआत की गयी यह देखकर मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है। इससे कई छोटे बच्चों को लाभ मिलेंगे। मुझे ख़ुशी है कि हम सब एकसाथ मिलकर यह सुनिश्चित कर पाएंगे कि हर व्यक्ति को जिंदगी में आवाजें सुनने की ख़ुशी मिल पाए।"

दुनियाभर में बहरेपन की समस्या से पीड़ित 466 मिलियन लोगों में से 34 मिलियन बच्चें हैं। जन्म के समय ही नवजात शिशु की सुनने की क्षमता की जांच होना कितना महत्वपूर्ण है यह बताते हुए एसएमएस मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल और कंट्रोलर डॉ. सुधीर भंडारी ने कहा, "सुन पाने और खुशहाल जीवन जीने में लोगों की मदद करना यक़ीनन एक अमूल्य अनुभव है। इस पहल में सहभागी होकर मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है, इसमें सभी नवजात शिशुओं की जन्म के समय ही जांच की जाएगी। हम ज्यादा से ज्यादा लोगों को यूएनएचएस के बारे में जागरूक करना चाहते हैं और मानते हैं कि बाल रोग विशेषज्ञ और अन्य सभी डॉक्टर्स जागरूकता को बढ़ाने में अहम् भूमिका निभा सकते हैं। हम सभी राज्य सरकारों से अनुरोध करते हैं कि नवजात शिशुओं की सुनने की क्षमता की जांच जन्म के समय ही करना अनिवार्य कर दिया जाए ताकि बहरेपन की समस्या के खिलाफ इस लड़ाई में हमें सहयोग मिलेगा और देश का भविष्य स्वस्थ, खुशहाल रहेगा।"

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