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इस बार भी लम्बी में लड़ा जायेगा चुनावी महाभारत

khaskhabar.com : मंगलवार, 08 नवम्बर 2016 7:18 PM (IST)
इस बार भी लम्बी में लड़ा जायेगा चुनावी महाभारत
मुक्तसर (नरेंद्र शर्मा ) । मुक्तसर का लंबी विधानसभा क्षेत्र आगामी विधानसभा चुनाव में भी सबसे अधिक पंजाब की राजनीति का केंद्र बिंदु रहने वाला है । क्योंकि इस बार भी इस क्षेत्र से पांच बार राज्य के मुख्यमंत्री रह चुके अकाली दल के सुप्रीमो प्रकाश सिंह बदल के ही इस विधान सभा चुनाव क्षेत्र से चुनाव मैदान में उतरने की सम्भावनाएं हैं । यह विधानसभा क्षेत्र बादल साहब का गृह क्षेत्र है । उनका गांव बादल भी इसी विधान सभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है ।बादल साहब पहले भी इस क्षेत्र से चार बार विजयी रह चुके हैं ।वह इस क्षेत्र से 1997 ,2002,2007 और 2012 में चुनाव लड़ चुके हैं । चारों बार ही वह अपने प्रतिद्वन्दी को पराजित करने में सफल रहे थे । यदि इस बार भी वह इस क्षेत्र से चुनाव लड़ते हैं तो इस क्षेत्र से यह उनका पांचवां चुनाव होगा । 1997 में बादल ने कांग्रेस के गुरनाम सिंह अबुल खुराना को 28728,2002 में अपने चचेरे भाई महेशइंद्र सिंह को 23929 मतों ,2007 में कांग्रेस के ही महेशइंद्र सिंह को ९१८७ मतों, और 2012 में पुनः महेशइंद्र सिंह को 24739 मतों से पराजित किया था । 1962 और 1967 के चुनाव में इस क्षेत्र से कांग्रेस के उजागर सिंह और एस चाँद विजयी घोषित किये गए थे । उसके बाद 1969 के चुनाव में सीपीआई के दान चंद सफल हुए थे । 1977 के बाद इस विधानसभा क्षेत्र से केवल एक बार 1992 में कांग्रेस के गुरनाम सिंह अबुल खुराना को विजय मिली थी । इसके इलावा 1977,1980,और 1985 में इस क्षेत्र से शिरोमणि अकाली दल के प्रत्यक्षी ही सफल होते रहे हैं । 2012 के विधान सभा चुनाव में बादल साहब ने अपने बड़े भाई गुरदास बादल को पराजित किया था । गुरदास बादल अपने बेटे मनप्रीत बादल की पार्टी पीपीपी की टिकट पर चुनाव लड़े थे । इस चुनाव में बड़ा दिलचस्प मुकाबला देखने को मिला था । पीपीपी की और से बादल के विरुद्ध उनके बड़े भाई मैदान में थे तो कांग्रेस की और से उनके चचेरे भाई महेश इंद्र सिंह कांग्रेस की और से उनके साथ लोहा ले रहे थे । 2012 के चुनाव में इस विधान सभा क्षेत्र में मतदाताओं की संख्या 140066 थी । जिसमें 73496 पुरुष और 66570 महिला मतदाता थे । सीएम प्रकाश सिंह बादल इस चुनाव में अपने लिए मतदाताओं से आखिरी बार वोट मांगेंगे क्योंकि यह शायद उनका अंतिम चुनाव होगा । उनके निकटवर्ती लोगों का कहना है की अब उम्र बादल साहब पर भारी पड़ने लगी है । अब उनका शरीर चुनावों की भाग -दौड़ को सहन नहीं कर सकता है ।

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