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सिंगल यूज प्लास्टिक के समुचित निपटान की समीक्षा बैठक

khaskhabar.com : मंगलवार, 10 सितम्बर 2019 8:49 PM (IST)
सिंगल यूज प्लास्टिक के समुचित निपटान की समीक्षा बैठक
चंडीगढ़। हरियाणा को प्लास्टिक मुक्त करने की दिशा में सरकार द्वारा प्रदेशवासियों को प्लास्टिक की थैलियों के स्थान पर कपास और जूट से बने थैलों का उपयोग करने के लिए जागरूक किया जा रहा है और बर्तन भंडार भी स्थापित किए जा रहे हैं, ताकि सिंगल यूज प्लास्टिक के उपयोग को कम किया जा सके।

हरियाणा की मुख्य सचिव केशनी आनन्द अरोड़ा ने यह जानकारी आज यहां वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कैबिनेट सचिव, भारत सरकार राजीव गाबा की अध्यक्षता में आयोजित सिंगल यूज प्लास्टिक के समुचित निपटान की समीक्षा बैठक में दी ।

बैठक में केशनी आनन्द अरोड़ा ने बताया कि आमजन को प्लास्टिक का कम उपयोग करने के लिए जागरूक किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा पहले ही सरकारी कार्यालयों में प्लास्टिक की पानी की बोतलों को प्रतिबंधित कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि विभिन्न व्यावसायिक संस्थानों और गैर सरकारी संस्थानों को सामुदायिक सामाजिक जिम्मेवारी (सीएसआर) के तहत जूट बैग बनाकर आमजन को वितरित करने का अनुरोध किया गया है, जिस पर कार्य प्रारंभ हो चुका है और जल्द ही लोगों को बैग वितरित किए जाएंगे। इसके साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में स्वयं सहायता समूहों में कार्य करने वाली महिलाओं से भी इस तरह के बैग बनाने का अनुरोध किया गया है। उन्होंने बताया कि गैर सरकारी संस्थानों के सहयोग से विभिन्न स्थानों पर बर्तन भंडार स्थापित किए गए हैं, ताकि प्लास्टिक से बने बर्तनों के उपयोग को तुरंत प्रभाव से कम किया जा सके।

अरोड़ा ने बताया कि इस अभियान के तहत प्लास्टिक का उपयोग करने वालों के चालान काटे जा रहे हैं। अब तक प्रदेश में लगभग 4 हजार चालान काटे जा चुके हैं और आगे भी प्लास्टिक का उपयोग न हो, इसके लिए सख्ती बरती जा रही है। उन्होंने बताया कि प्लास्टिक वेस्ट का निपटान करने के लिए सडक़ निर्माण में भी प्लास्टिक वेस्ट का उपयोग किया जा रहा है। प्रधानमंत्री ग्राम सडक़ योजना के तहत सडक़ निर्माण में भी 25 प्रतिशत प्लास्टिक का उपयोग किया जाएगा।

बैठक में बताया गया कि 11 सितंबर से 27 अक्तूबर, 2019 तक ‘स्वछता ही सेवा’ कार्यक्रम चलाया जाएगा जिसका थीम ‘प्लास्टिक वेस्ट श्रमदान’ होगा। बैठक में बताया गया कि 6 हफ्तों तक चलाए जाने वाला यह कार्यक्रम तीन चरणों में पूरा किया जाएगा। पहला चरण 11 सितम्बर से 1 अक्तूबर, 2019 तक होगा, जिसमें लोगों को प्लास्टिक का उपयोग न करने के लिए जागरूक किया जाएगा। स्कूलों और कॉलेजों में भी जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएंगे। इसके अलावा, संबंधित विभाग द्वारा प्लास्टिक वेस्ट को एकत्र करने और उसके प्रबंधन के लिए स्थान चिन्हित किए जाएंगे। पहले चरण में प्लास्टिक बैग के स्थान पर जूट के थैलों के प्रयोग को बढ़ावा देने के लिए भी अभियान चलाया जाएगा।

कार्यक्रम के दूसरे चरण में 2 अक्टूबर को शहरों एवं ग्रामीण क्षेत्रों में प्लास्टिक वेस्ट को एकत्र करके चिहिन्त स्थानों पर उसका प्रबंधन किया जाएगा। तीसरे चरण में दोबारा उपयोग में लाए जाने वाले और एकल प्रयोग वाले प्लास्टिक को अलग-अलग कर प्लास्टिक कचरे का प्रबंधन किया जाएगा। दोबारा उपयोग में लाए जाने वाले प्लास्टिक को विभिन्न औद्योगिक इकाइयों तक पहुंचाया जाएगा ताकि वे इसको पुन: उपयोग कर सकें।

बैठक में लोक निर्माण (भवन एवं सडक़ें) विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव आलोक निगम, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव धीरा खण्डेलवाल, स्कूल शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव महावीर सिंह, विकास एवं पंचायत विभाग के प्रधान सचिव सुधीर राजपाल, शहरी स्थानीय निकाय विभाग के प्रधान सचिव आनंद मोहन शरण, उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के निदेशक यश गर्ग सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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