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मध्यप्रदेश की इन सीटों पर कल होगा मतदान, यहां जानें हर सीट का आकलन

khaskhabar.com : शनिवार, 11 मई 2019 11:27 AM (IST)
मध्यप्रदेश की इन सीटों पर कल होगा मतदान, यहां जानें हर सीट का आकलन



गुना (सामान्य) लोकसभा सीट से कांग्रेस और सिंधिया परिवार के नुमाइंदे ही जीतते रहे हैं। 2014 में कांग्रेस के ज्योतिरादित्य सिंधिया चौथी बार जीते। इनसे पहले माधवराव सिंधिया और भारतीय जनता पार्टी की संस्थापक सदस्य विजयाराजे सिंधिया सांसद रहीं। 1999 से कांग्रेस का कब्जा है। पहले भाजपा की विजयाराजे सिंधिया 1989 से 1999 तक सांसद रहीं। कांग्रेस 9, भाजपा 4 और जनसंघ 1-1 बार जीत चुकी है। 8 विधानसभा सीटों में में बमोरी, चंदेरी, पिछोर, मुंगावली, अशोकनगर पर कांग्रेस तो शिवपुरी, गुना, कोलारस पर भाजपा काबिज है। सिंधिया परिवार के लिए अपारजेय इस सीट पर मुकाबला कांग्रेस के ज्योतिरादित्य सिंधिया और भाजपा के नए प्रत्याशी डॉ. केपी यादव के बीच है। कांग्रेस का पलड़ा भारी है ऐसे में भाजपा का नया प्रयोग उसके मतों का कितना प्रतिशत बढ़ाएगा, यही देखा जाएगा।
इस बार भिंड (अनुसूचित जाति) लोकसभा सीट पिछले साल दो अप्रैल 2018 को हुए दलित संगठनों के भारत बंद के दौरान ग्वालियर-चंबल में दलित बनाम सवर्ण से एकाएक सुर्खियों में आए युवा चेहरा देवाशीष जरारिया का कांग्रेस उम्मीदवार बनने से अलग चर्चाओं में है। हालाकि ब्राह्मणवाद और मनुवाद के प्रखर विरोधी रहे देवाशीष अब खुद को अम्बेडकरवादी कांग्रेसी कह सबको साथ लेकर चलने की बात कह रहे हैं। भाजपा ने पूर्व ब्यूरोक्रेट और मौजूदा सांसद भागीरथ प्रसाद का टिकट काटकर मुरैना के दिमनी की पूर्व विधायक संध्या राय पर दांव खेल सबको चौंकाया है। संध्या शिवराज गुट की हैं तथा पार्टी की वफादार मानी जाती हैं। 2009 में परिसीमन के बाद भिण्ड अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हुई तबसे भाजपा लगातार दोनों बार जीती। इतिहास में झांके तो 8 बार भाजपा तो केवल 3 बार कांग्रेस यहां परचम लहरा सकी। 8 विधानसभा सीटों में 5 लहार, मेहगांव, सेवड़ा, भांडेर, गोहद में कांग्रेस अटेर, दतिया में भाजपा तो भिण्ड में बसपा काबिज है। जातिगत समीकरणों के लिहाज से भी नतीजा रोचक होगा। टक्कर कांग्रेस-भाजपा के बीच सीधी है।

बुंदेलखंड अंचल की सागर (सामान्य) लोकसभा सीट मप्र का सबसे बड़ा संभाग है। यहां 6 बार से भाजपा जीत रही है। जातिगत समीकरण के लिहाज से ठाकुर और जैन समुदाय का वर्चस्व है। मुकाबला भाजपा-कांग्रेस के बीच दो दागी ठाकुरों में सीधा-सीधा है। भाजपा दो बार के सांसद लक्ष्मीनारायण यादव की जगह नया चेहरा नगर निगम के अध्यक्ष रायबहादुर सिंह ठाकुर को जबकि कांग्रेस ने प्रभुसिंह ठाकुर को मैदान में उतारा है जो दिग्विजय कैबिनेट में राज्यमंत्री थे। इस बार जैन समाज का रुख साफ नहीं दिखने से कशमकश काफी रोचक है। हालांकि, भाजपा से बगावत कर निर्दलीय पर्चा दाखिल कर वापस ले चुके मुकेश जैन ढाना को टिकट न मिलने से जैन समाज की नाराजगी कितनी दूर हुई यह अन्दर की बात है। इसमें 8 विधानसभा आती हैं जिनमें बीना, खुरई, नरयावली, सागर, सिरोंज, शमशाबाद, कुरवाई में भाजपा एकमात्र सुरखी में कांग्रेस काबिज है। ऐसे में प्रत्याशी बदलने व भीतरघात का असर चुनावी नतीजों पर कितना पड़ेगा यह नतीजों से ही साफ होगा।

राजगढ़ (सामान्य) लोकसभा सीट दिग्विजय सिंह के दबदबे वाली मानी जाती है जहां दो बार खुद दिग्गी राजा तो 5 बार उनके भाई लक्ष्मण सिंह सांसद रहे। पिछली बार यह सीट भाजपा की झोली में थी। कांग्रेस ने पहली बार किसी महिला को उम्मीदवार बनाया है जो दिग्विजय की पसंद है। वहीं भाजपा ने वर्तमान सांसद रोडमल नागर पर ही दांव खेला है। बसपा ने निशा त्रिपाठी को मैदान में उतारा जरूर लेकिन उन्होंने नाम वापस ले लिया जिससे त्रिकोणीय मुकाबला अब सीधा है। मोना तीन बार से जिला पंचायत सदस्य हैं जिसका फायदा उन्हें मिलेगा। इस सीट पर 6 बार कांग्रेस 3 बार भाजपा जीत चुकी है। इसमें 7 विधानसभा सीटों में 5 पर चाचौड़ा, राघोगढ़, खिलचीपुर, ब्यावरा, राजगढ़ कांग्रेस तथा नरसिंहगढ़ व सुसनेर में भाजपा व निर्दलीय हैं। मप्र के तीसरे चरण में जहां भोपाल सबसे अलग रंग में है। वहीं, 3 अन्य सीटें अब भी हाईप्रोफाइल हैं। कुल मिलाकर 6 में नाक की लड़ाई तो 2 में प्रभाव के दमखम पर मुहर 23 मई को लग पाएगी जो देखने लायक होगा।


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