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अरावली पर्वत श्रृंखला के आसपास पौधारोपण करने वाली संस्थाओं का होगा स्वागत

khaskhabar.com : रविवार, 21 जुलाई 2019 5:09 PM (IST)
अरावली पर्वत श्रृंखला के आसपास पौधारोपण करने वाली संस्थाओं का होगा स्वागत
चण्डीगढ़ । हरियाणा के वन मंत्री राव नरवीर सिंह ने कहा कि हरियाणा राज्य का सौभाग्य है कि अरावली पर्वत श्रृंखला प्रदेश में है और यदि कोई गैर-सरकारी संस्था इस पर्वत श्रृंखला के आसपास पौधारोपण करना चाहे तो राज्य सरकार उसका स्वागत करेगी। इसके अलावा, वन विभाग के पदाधिकारियों को इस बारे में दिशा-निर्देश दिए गए हैं कि यदि कोई संस्था पौधारोपण के लिए आगे आती है तो उसके साथ पौधारोपण को लेकर समझौता किया जा सकता है।
यह बात उन्होंने गुरुग्राम जिला के गांव झाड़सा में पौधारोपण करने उपरांत उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए जन-सहभागिता अत्यंत आवश्यक है क्योंकि लोगों के सहयोग के बिना पर्यावरण को संरक्षित करना असंभव है।
उन्होंने कहा कि जहां भी विकास होता है सबसे पहले पेड़ों की बलि ली जाती है लेकिन जितने पेड़ कटे हम उससे ज्यादा पौधे लगाएं और उनका पोषण करें तभी हमारा पर्यावरण संतुलित रह सकता है । आज गुरुग्राम जिला की गिनती देश के सबसे अधिक प्रदूषित शहरों में की जाती है जो कि काफी निराशाजनक है। जिला को स्वच्छ व सुंदर बनाए रखने के लिए जरूरी है कि यहां अधिक से अधिक पौधारोपण किया जाए । उन्होंने कहा कि अक्सर हम पेड़ तो लगा लेते हैं लेकिन उनका रखरखाव नहीं करते जिसके कारण वे मर जाते हैं। इसलिए हम केवल पेड़ लगाने तक सीमित ना रहे बल्कि उसकी परवरिश अपने शिशु की तरह करें।
मंत्री ने कहा कि सरकार द्वारा पॉलीथिन का प्रयोग बैन किया गया है लेकिन जब तक लोग इसका इस्तेमाल बंद नहीं करेंगे तब तक यह हमारे पर्यावरण को प्रदूषित करता रहेगा, इसलिए लोगों को पॉलिथीन का प्रयोग नहीं करना चाहिए और दूसरे लोगों को भी जूट तथा कपड़े के थैलों का इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्लास्टिक व पॉलीथिन पर्यावरण के लिए एक बड़ा खतरा है। विशेषज्ञों के अनुसार पॉलिथीन को गलने में लगभग 450 साल का समय लगता है। पॉलिथीन को जलाने पर इसमें से जहरीली गैस निकलती है जो पर्यावरण को प्रदूषित करती है। उन्होंने कहा कि जनसाधारण को पॉलीथिन का प्रयोग बंद करना होगा तभी प्रदूषण के स्तर को नीचे लाया जा सकता है।
राव नरबीर सिंह ने कहा कि गुरुग्राम जिला में समृद्ध व संपन्न लोग हैं जहां शादी ब्याह के कार्ड छपवाने पर हजारों रुपए खर्च किए जाते हैं। उन्होंने कहा कि कागज से बनने वाले इन कार्डो के लिए पेड़ काटे जाते हैं। यदि हम शादी ब्याह में कार्डों का इस्तेमाल बंद कर दें और अपने परिचितों को मोबाइल से मैसेज आदि करके आमंत्रित करें तो पेड़ों की कटाई को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

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