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महामारी के समय में लोगों को कला की हीलिंग एवं थेराप्यूटिक टच की आवश्यकता - मुग्धा सिन्हा

khaskhabar.com : रविवार, 27 सितम्बर 2020 5:25 PM (IST)
महामारी के समय में लोगों को कला की हीलिंग एवं थेराप्यूटिक टच की आवश्यकता - मुग्धा सिन्हा
जयपुर । कला में थेराप्यूटिक और हीलिंग टच होता है। महामारी के इस दौर में समाज पर पड़ रहे वित्तीय प्रभाव के कारण कलाकारों और स्मारकों को और अधिक सपोर्ट की आवश्यकता होगी। ये ऐसा भी समय है जब लोगों में मानवता को जीवित और विचारशील रखने के लिए कला की आवश्यकता होगी। यह बात राजस्थान सरकार की कला एवं संस्कृति विभाग की शासन सचिव मुग्धा सिन्हा ने कही। वे रविवार को विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर आयोजित पब्लिक आर्ट पर इंटरेक्टिव टॉक सेशन में संबोधित कर रहीं थी।

कार्यक्रम का आयोजन सेंटर फॉर डिज़ाइन एक्सीलेंस (कोड), विवेकानंद ग्लोबल यूनिवर्सिटी (वीजीयू) द्वारा राजस्थान सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग; कला एवं संस्कृति, पुरातत्व और संग्रहालय विभाग, राजस्थान सरकार और जेकेके के सहयोग से किया गया। सेशन का संचालन सेंटर फॉर डिज़ाइन एक्सीलेंस(कोड), सेंटर हेड, विवेकानंद ग्लोबल यूनिवर्सिटी (वीजीयू), एआर.श्वेता चौधरी ने किया।
प्रसिद्ध स्वतंत्र कलाकार, श्री युनूस खिमानी ने कहा कि कला मुख्यत: म्यूजियम और गैलेरीज में स्थित हैं। ये वे स्थान हैं जहां कभी-कभी आम जनता जाने से हिचकिचाती हैं। हालांकि, आप लोगों को म्यूजियम में घूमते हुए देख सकते हैं लेकिन गैलेरीज में आमतौर पर कोई नहीं जाता। इसलिए कला उन लोगों के लिए एलीट डोमेन बनी हुई है जो शिक्षित हैं और गैलेरीज में जाते हैं। गैलेरी में स्थित कोई आर्टवर्क बाद में आमतौर पर प्राइवेट स्पेस में सिमट कर रह जाती है। कोई इसे खरीदता है और फिर यह उनके ड्राइंग रूम, बेडरूम या यहां तक ​​कि बाथरूम तक सीमित होकर रह जाती है। यही कारण है कि आम जनता कला से अछूती रह जाती है। पब्लिक आर्ट, कला का वो डोमेन है जहां कला और जनता के बीच वास्तविक इंटरेक्शन होता है। यही कारण है कि कई कलाकार पब्लिक आर्ट का अभ्यास करना चाहते हैं ताकि उनका काम जनता के सीधे संपर्क में हो और उनसे इंटरेक्शन कर सकें।

आर्किटेक्ट, फोटोग्राफर, शिक्षक और कलाकार एआर. हेमांगी कडू ने कहा कि पब्लिक आर्ट के माध्यम से सकारात्मक परिवर्तन लाने और प्रतिबंधात्मक धारणाओं को तोड़ने की आवश्यकता है। प्लानिंग प्रोसेस समावेशी, खुले विचारों वाला, गैर विनाशकारी और उत्साहवर्धक होना चाहिए। यह न केवल सौंदर्यीकरण प्रोजेक्ट होना चाहिए, बल्कि ऐसा कि जो पहचान बनाए, अपनेपन की भावना विकसित करे और शहरी अनुभवों के माध्यम से कई यादें संजोने में मदद करे। वीजीयू के सीईओ ओंकार बगड़िया ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

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