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नेशनल हेराल्ड: वित्तीय निर्णय वोरा लेते थे, कांग्रेसी नहीं दे पाए सबूत

khaskhabar.com : शुक्रवार, 05 अगस्त 2022 5:11 PM (IST)
नेशनल हेराल्ड: वित्तीय निर्णय वोरा लेते थे, कांग्रेसी नहीं दे पाए सबूत
नई दिल्ली। नेशनल हेराल्ड केस में सभी कांग्रेस नेताओं ने वित्तीय लेनदेन की जानकारी से अपना पल्ला झाड़ लिया है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के करीबी सूत्रों ने कहा है कि पूछताछ के लिए बुलाए गए कांग्रेस नेताओं में से किसी ने भी यह साबित करने के लिए कोई दस्तावेज नहीं दिया कि एसोसिएटेड जर्नल लिमिटेड (एजेएल) और यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड सौदे से जुड़े सभी वित्तीय निर्णय स्वर्गीय मोतीलाल वोरा द्वारा लिए गए थे।

कांग्रेस पार्टी के सबसे लंबे समय तक कोषाध्यक्ष रहे वोरा का 2020 में निधन हो गया।

दिलचस्प बात यह है कि जब राहुल गांधी से यंग इंडियन-एजेएल सौदे के वित्तीय पहलुओं के बारे में सवाल किया गया था, तो उन्होंने अधिकारियों से कहा था कि सभी लेनदेन वोरा द्वारा नियंत्रित किए जाते हैं। ईडी के सामने राहुल और सोनिया के अलावा कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खडग़े और पवन कुमार बंसल ने भी यही नाम लिया था।

कांग्रेस नेता मल्लिार्जुन खडग़े यंग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के एक मात्र कर्मचारी हैं। ऐसे में ईडी के पास पूछताछ के लिए खडग़े को बुलाने के अलावा और कोई विकल्प नहीं था। सूत्रों के मुताबिक मामले की जांच के दौरान ईडी को कई फर्जी कंपनियां मिलीं। जिनसे यंग इंडिया का लेनदेन होता था। ईडी को कंपनी के 90 करोड़ की लेनदेन पर शक है।

प्रवर्तन निदेशालय ने गुरुवार को नेशनल हेराल्ड मामले में कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खडग़े से 8 घंटे पूछताछ की थी। जांच एजेंसी ने उनसे यंग इंडिया के ऑफिस में ही पूछताछ की। पूछताछ दोपहर करीब 12.30 बजे शुरू हुई। इस दौरान ऑफिस की तलाशी भी ली गई। खडग़े 8 घंटे बाद रात करीब 8.30 बजे दफ्तर से बाहर निकले। इधर, ईडी के समन पर राज्यसभा में भी विपक्ष के नेता खडग़े ने गुरुवार को ही सवाल उठाया था। उन्होंने पूछा था कि क्या संसद की कार्यवाही के दौरान बुलाना सही है? इस पर केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने जवाब दिया कि कोई गलत करेगा तो एजेंसियां तो एक्शन लेंगी ही। इसके बाद दोनों में बहस शुरू हो गई।

इससे पहले बुधवार को भी यहां तलाशी ली जा चुकी है। छापेमारी के बाद ईडी ने नेशनल हेराल्ड की बिल्डिंग में यंग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड का ऑफिस सील कर दिया था। इसके बाद कांग्रेस के नेता बीजेपी पर हमलावर हो गए और देश के लोकतंत्र की हत्या का आरोप लगाया।

गौरतलब है कि मोतीलाल वोरा कांग्रेस के दिग्गज नेता थे। वे दो बार मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री रहे। 2000 से 2018 तक (18 साल) पार्टी के कोषाध्यक्ष भी रहे थे। 21 दिसंबर 2021 में उनका निधन हो गया था। 1970 में कांग्रेस में शामिल हुए। 1972 में कांग्रेस के टिकट पर विधायक बने। इसके बाद 1977 और 1980 में भी विधायक चुने गए। अर्जुन सिंह की कैबिनेट में पहले उच्च शिक्षा विभाग में राज्य मंत्री रहे। 1983 में कैबिनेट मंत्री बनाए गए। 1981-84 के दौरान वे मध्यप्रदेश राज्य सडक़ परिवहन निगम के चेयरमैन भी रहे।

13 फरवरी 1985 में वोरा को मध्यप्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया गया। 13 फरवरी 1988 को मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा देकर 14 फरवरी 1988 में केंद्र के स्वास्थ्य-परिवार कल्याण और नागरिक उड्डयन मंत्रालय का कार्यभार संभाला। अप्रैल 1988 में वोरा मध्य प्रदेश से राज्यसभा के लिए चुने गए। 26 मई 1993 से 3 मई 1996 तक उत्तर प्रदेश के राज्यपाल भी रहे।

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