Monkeys died of pneumonia, revealed by postmortem-m.khaskhabar.com
×
khaskhabar
May 8, 2021 12:18 am
Location
Advertisement

UP के संभल में निमोनिया से हुई थी बंदरों की मौत, पोस्टमार्टम से हुआ खुलासा

khaskhabar.com : शुक्रवार, 10 अप्रैल 2020 07:08 AM (IST)
UP के संभल में निमोनिया से हुई थी बंदरों की मौत, पोस्टमार्टम से हुआ खुलासा
नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के संभल जिले में कई बंदरों की मौत निमोनिया के कारण हुई है। इसका खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हुआ है। संभल के मुख्य पशु चिकित्साधिकारी(सीवीओ) डॉ. विनोद कुमार ने आईएएनएस को बताया कि बरेली के भारतीय पशु चिकित्सा संस्थान(आईवीआरआई) में हुए पोस्टमार्टम के बाद पता चला कि बंदरों की मौत निमोनिया से हुई। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स में 19 बंदरों की मौत बताई जा रही है, लेकिन डॉ. विनोद ने सिर्फ सात बंदरों की मौत की बात कही है।

संभल जिले में पवांसा क्षेत्र है। यहां पिछले एक हफ्ते से बंदरों के बीमार होने और मरने का सिलसिला जारी है। यहां मंदिर के आसपास काफी संख्या में बंदर रहते हैं। बंदरों के मरने का सिलसिला शुरू हुआ तो पशु चिकित्सा विभाग में हड़कंप मच गया। छह अप्रैल को बंदरों को पोस्टमार्टम के लिए देश के सबसे बड़े संस्थान बरेली स्थित भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान(आईवीआरआई) के सेंटर फॉर एनिमल डिजीज रिसर्च एंड डायग्नोस्टिक भेजा गया। पोस्टमार्टम के बाद आईवीआरआई ने संभल के पशु चिकित्सा विभाग को रिपोर्ट भेज दी। जिसके मुताबिक बंदरों की मौत निमोनिया के कारण हुई थी।

आईवीआरआई के एक प्रधान वैज्ञानिक ने आईएएनएस से कहा, "बंदरों के बाएं फेफड़े में निमोनिया के लक्षण मिले। सांस नली में रक्तरंजित स्राव मिला। किडनी और लीवर में समस्या दिखी। बैक्टीरियल इंफेक्शन की भी आशंका है।"

संभल के मुख्य पशु चिकित्साधिकारी(सीवीओ) डॉ. विनोद कुमार ने आईएएनएस से कहा, अब तक सात बंदरों की मौत हुई है। स्थानीय मीडिया गलत संख्या पेश कर रहा है। आईवीआरआई से आई रिपोर्ट के मुताबिक, बंदरों की मौत निमोनिया से हुई। अब हमारा फोकस दूसरे बंदरों को बचाने पर है।

डॉ. विनोद ने बताया कि बंदरों की मौत की घटना के बाद से पशु चिकित्सा विभाग की टीम सक्रिय हो गई है। वन विभाग भी इस काम में लगा है। दूसरे बंदरों को बचाने के लिए उनका इलाज किया जा रहा है। बंदरों को केले में टेबलेट दिया जा रहा है। हालांकि कुछ बंदर केले से टेबलेट निकालकर फेंक देते हैं। ऐसे में हम टेबलेट को पीसकर केले में मिला रहे हैं। ताकि अन्य बंदर निमोनिया के प्रभाव से बच सकें। (आईएएनएस)

ये भी पढ़ें - अपने राज्य / शहर की खबर अख़बार से पहले पढ़ने के लिए क्लिक करे

Advertisement
Khaskhabar UP Facebook Page:
Advertisement
Advertisement