Misuse of public money in the form of corruption will expose them: CM Manohar Lal-m.khaskhabar.com
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Sep 23, 2019 1:37 pm
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जनता के पैसे का दुरुपयोग भ्रष्टाचार के रूप में किया है उन्हें बेनकाब कर के रहेंगे : CM मनोहर लाल

khaskhabar.com : मंगलवार, 10 सितम्बर 2019 9:18 PM (IST)
जनता के पैसे का दुरुपयोग भ्रष्टाचार के रूप में किया है उन्हें बेनकाब कर के रहेंगे : CM मनोहर लाल
चंडीगढ़। हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा है कि पिछली सरकारों के समय जिन लोगों ने जनता के पैसे का दुरुपयोग भ्रष्टाचार के रूप में किया है उन्हें वे बेनकाब कर के रहेंगे, चाहे वह कोई भी हो, जिनके माध्यम से रॉबर्ट वाड्रा को जमीन खरीद या सीएलयू के मामलों में फायदा पहुंचाने का कार्य किया गया है। इन मामलों की जांच या तो केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो या चौकसी ब्यूरो या प्रवत्र्तन निदेशालय जैसी जांच एजेंसियों को राज्य सरकार ने सौंपी है। कुछ मामले न्यायालय के विचाराधीन भी हैं। जांच रिपोर्ट व सबूतों के आधार पर जो दोषी होगा उसे सजा होगी जो निर्दोष होगा तो छूट जाएगा।

मुख्यमंत्री अपनी सरकार का पांच वर्ष का कार्यकाल लगभग पूरे होने उपरांत सरकार की उपलब्धियों पर एक मीडिया साक्षात्कार के माध्यम से खुले मंच से चण्डीगढ़ में लोगों से रूबरू हो रहे थे। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार पर जीरो टोलरेंस नीति पिछले पांच वर्षों में उन्होंने अपनाई है और काफी हद तक इसमें सफल भी रहे हैं। ऑनलाइन अध्यापक स्थानांतरण नीति व पारदर्शी तरीके से मैरिट के आधार पर भर्ती इसके दो बडे उदाहरण हैं जिनकी चर्चा हरियाणा के लोग ही नहीं कर रहे बल्कि देश के अन्य राज्यों में भी हो रही है। यहां तक की प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 8 सितम्बर को अपने रोहतक दौरे के दौरान भी अपने सम्बोधन में कही थी।

एक प्रश्न के उत्तर में मुख्यमंत्री ने कहा कि रॉबर्ट वाड्रा मामले में सरकार ने जस्टिस ढीगड़ा आयोग का गठन किया था और आयोग ने अपनी रिपोर्ट भी सौंप दी थी। परन्तु कहीं न कहीं पूर्व मुख्यमंत्री श्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डïा को रिपोर्ट से इस बात का अंदेशा हो गया था कि रिपोर्ट में उनके माध्यम से ही रॉबर्ट वाड्रा को फायदा पहुंचाने का कार्य किया गया। इसलिए उन्होंने ही कांग्रेस के बडे नेता एवं सर्वोच्च न्यायालय के जाने-माने वकील कपिल सिब्बल को पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में खड़ा कर दिया, जिन्होंने ढीगड़ा आयोग के गठन पर ही प्रश्नचिह्नï लगा कर न्यायालय ने अपना तर्क दिया। अब मामला न्यायालय में है, परन्तु आयोग की रिर्पोट के बारे में न तो कपिल सिब्बल ने सवाल उठायाऔर न ही न्यायालय ने कुछ कहा है।


सरकार का काम न्यायालय के आदेश पर जांच एजेंसियों के माध्यम से तथ्य उपलब्ध करवाना है जो सरकार ने किया है। यह इस मामले में सरकार की मंशा किसी प्रकार की राजनीतिक द्वेषता से कार्य करने की कभी नहीं रही।जब पूर्व मुख्यमंत्री स्वयं विधानसभा सदन में किसी भी एजेंसी से जांच करवाने को तैयार थे तो अब वे किस मुंह से इसे बदले की भावना से कार्य करने की बात कह रहे हैं। उनके खिलाफ अलग-अलग मामलों में अलग-अलग एजेंसियां अपने तरीके से जांच कर रही हैं।

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