Lost his hand but did not lose his courage, Shantilal set the example by running a computer with his foot-m.khaskhabar.com
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Feb 17, 2020 8:43 am
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हाथ गंवा दिया परन्तु कम नहीं हुआ हौसला, पैर से कम्प्यूटर चलाकर पेश की मिसाल

khaskhabar.com : मंगलवार, 21 जनवरी 2020 4:26 PM (IST)
हाथ गंवा दिया परन्तु कम नहीं हुआ हौसला, पैर से कम्प्यूटर चलाकर पेश की मिसाल
सैयद हबीब
चित्तौड़गढ़।
'ईश्वर एक रास्ता बंद करता है तो दूसरा खोल देता है।' हिंदी की प्रसिद्ध लेखिका शिवानी की यह पंक्ति चित्तौड़गढ़ के दिव्यांग शांतिलाल शर्मा की जिंदगी पर चरितार्थ होती है। दस साल पहले 11,000 केवी के हाई-टेंशन लाइन पर काम करते वक्त हुई दुर्घटना में शांतिलाल ने अपने दोनों हाथ गंवा दिए थे। तब शायद उन्होंने यह सोचा भी नहीं होगा कि इस विषम परिस्थिति से निकलकर वह व्यवसाय में ऐसा मुकाम हासिल करेंगे कि लोग उनकी मिसाल देंगे।

यह सब संभव हो सका शांतिलाल की जीवटता और गैर-सरकारी संस्था ऐड-एट-एक्शन द्वारा चलाए जा रहे लाइवलीहुड जेनेरेशन प्रोग्राम के जरिए, जिसनें उन्हें एक नई जिंदगी दी। शांतिलाल की ज़िंदगी में आए बदलाव का लेकर ऐड-एट-एक्शन के लाइवलीहुड एजुकेशन की प्रोग्राम डायरेक्टर डॉ. ऐश्वर्य महाजन कहते हैं कि "शांतिलाल की प्रेरक कहानी जीवन में सफलता पाने के लिए उनकी लगन और समर्पण को दर्शाती है। उनको उद्यमी बनते हुए देखना काफी सुखद और प्रेरणादायक है।"

ऐड-एट-एक्शन के आईलीड प्रोग्राम के संपर्क में आने के बाद मेरे जीवन की एक नई यात्रा शुरू हुई- शांतिलाल शर्मा:
वर्तमान में शांतिलाल अपनी पत्नी के सहयोग से अपने गांव में ई-मित्र केंद्र व सीएससी (कॉमन सर्विस सेंटर) संचालित कर रहे हैं। उनका सेंटर चित्तौड़गढ़ (राजस्थान) की दो प्रमुख बैंक शाखाओं के लिए डेटा संग्रह केंद्र के रूप में काम करता है। संघर्ष से सफलता की राह पर लाने वाले आईलीड प्रोग्राम को लेकर शांतिलाल कहते हैं कि वर्ष 2008 में जब हादसा हुआ उसके बाद जीवन में काफी मुश्किलें आई। गंभीर जख्म के बाद भी मुआवजा नहीं मिला और इलाज के लिए भारी खर्च भी उठाना पड़ रहा था। इन सब से थक कर उन्होंने अपनी सारी आशाएं खो दी थीं। फिर एक ‘जनसुनवाई’ के दौरान वो जिला कलक्टर से मिले, जिन्होंने उन्हें आईलीड (iLEAD) चित्तौड़गढ़ जाने की सलाह दी।

उन्होंने बताया कि आईलीड के संपर्क में आने के बाद उनके लिए जीवन की एक नई यात्रा शुरू हुई। संस्था आशा की किरण बनकर आया। जहां उन्होंने अपने पैर की उंगलियों से कंप्यूटर चलाना सीखा। फैकल्टी ने प्रशिक्षण के दौरान विशेष ध्यान दिया, जिसने काफी आत्मविश्वास बढ़ाया। ऐड-एट-एक्शन के आईलीड प्रोग्राम में उन्हें डेस्क टॉप पब्लिशिंग ऑपरेटर ट्रेड-इन में प्रशिक्षित किया गया था। आईलीड और अन्य लोगों के प्रयासों से राजस्थान के ग्रामीण विकास मंत्री ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम में कंप्यूटर प्रदान किया। इसके बाद उन्होंने खुद के व्यवसाय शुरू कर दिया।

सुविधाओं से वंचित युवाओं को जीविकोपार्जन के योग्य बनाने की दिशा में काम करता है आईलीड : आईलीड (iLEAD) ऐड-एट-एक्शन का एक खास पहल है जो सुविधाओं से वंचित समाज के युवाओं को जीविकोपार्जन के योग्य बनाने की दिशा में काम करता है। समग्र रूप से विकसित यह प्रोग्राम कौशल विकास के साथ-साथ सॉफ्ट स्किल और परामर्श की व्यवस्था भी करता है ताकि युवाओं में आत्मविश्वास का संचार हो सके। प्रोग्राम का उद्देश्य प्रतिभावन युवाओं को एक मंच देना है जिसके सहारे वो खुद को आत्मनिर्भर बना सकें।

सुविधाओं के अभाव और निम्न शिक्षा स्तर में जी रहे परिवार के युवाओं के लिए रोजगारोन्मुख शिक्षा को केंद्र में रखते हुए ऐड-एट-एक्शन ने आईलीड (iLEAD) पहल की शुरुआत की थी। इस प्रोग्राम से सामाजिक विकास और आर्थिक सशक्तिकरण को बल मिला है। 2005 में भारत में शुरू किया गया यह प्रोग्राम इन दिनों नेपाल और श्रीलंका में भी चलाया जा रहा है। 75% प्लेसमेंट रेट के साथ अभी तक इस प्रोग्राम ने लगभग 120 ग्रामीण और 1005 शहरी क्षेत्रों को लाभ पहुंचाया है। 31 अक्टूबर 2019 तक 2,28,095 युवाओं को इसके माध्यम से प्रशिक्षित किया गया है। आईलीड कुछ खास पहल जैसे आन्ट्रप्रनर्शिप एंड एम्प्लॉयबिलिटी पोटेंशियल असेसमेंट (ईईपीए), गॉसिप सर्किल फॉर एम्पावरमेंट (जीसीई) और एंटरप्राइज डेवलपमेंट मॉडल फॉर आईलीड (ईडीएमआई) के साथ नित नई ऊंचाइयों को छू रहा है।

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