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हिमाचल के विधायकों ने लिया है लाखों का लोन, लेकिन वापिसी में कोई दिलचस्पी नहीं

khaskhabar.com : शुक्रवार, 08 नवम्बर 2019 4:09 PM (IST)
हिमाचल के विधायकों ने लिया है लाखों का लोन, लेकिन वापिसी में कोई दिलचस्पी नहीं
शिमला। गरीबी बेरोजगारी से जूझ रहे हिमाचल प्रदेश के विधायकों के लिये कोई न कोई सुविधा मिल ही जा रही है, जिससे उनके लिये चुनाव हारने के बाद भी कोई दिक्कत पैदा न हो। ताजा मामला प्रदेश के मौजूदा व पूर्व विधायकों को प्रदेश विधानसभा की ओर से अवास व वाहन लेने के लिये दिये ऋण का है।

आरटीआई कार्यकर्ता देव आशीष भटचार्य की ओर से सूचना के अधिकार के तहत विध्धनसभा से ली गई जानकारी में पता चला है कि 73 विधायकों ने लोन लिया है। अभी इसमें मुख्यमंत्री रह चुके नेताओं के नाम शामिल नहीं हैं। इन्हें चार प्रतिशत ब्याज पर यह लोन मिला है। लेकिन इसे कब तक भरा जाना है,इसकी कोई समय सीमा निर्धारित नहीं है। जिससे इनकी मौज लगी है।

हालांकि देश में किसानों को खेतीबाड़ी के लिए 4 प्रतिशत ब्याज दर पर कर्ज देने की व्यवस्था है, लेकिन किसान कर्ज चुका नहीं पाता और आत्महत्याएं की जा रही हैं। उनका जीवन स्तर ऊपर नहीं उठ रहा है। लेकिन यदि आप एक बार एमएलए बन गए तो फिर आपकी मौज है। क्योंकि सुविधाएं और सहुलियतें मिलने के बाद आपको कर्ज भी मिलेगा, वह भी 4 प्रतिशत ब्याज पर। पूर्व विधायक भी बन जाएंगे तो भी घर और गाड़ी खरीदने के लिए इसी ब्याज पर कर्ज दिया जाएगा। हिमाचल में कई पूर्व विधायक विधानसभा से एडवांस लोन ले चुके हैं, लेकिन चुकाएंगे कब तक, इसका कुछ पता नहीं।

मिली जानकारी के मुताबिक प्रदेश के 73 पूर्व विधायक ऐसे हैं, जिन्होंने विधानसभा से लोन किया है। इनमें भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने 15 लाख लोन लिया है, जिसमें 7 लाख 55 हजार 25 रुपये चुकाने बाकी है। इसी तरह पूर्व मंत्री और मौजूदा सांसद किशन कपूर ने भी 20 लाख कर्ज लिया है, जिसमें से 7 लाख 88 हजार रुपये चुकाने हैं। पूर्व विधायक नवीन धीमान ने भी विधायक रहते 15 लाख रूपये कर्ज लिया था और अब तक 13 लाख 92 हजार बकाया है। पूर्व भाजपा सरकार में मंत्री रविंद्र सिंह रवि ने 35 लाख कर्ज लिया था, जिसमें 26 लाख देने हैं। कांग्रेस नेता सुधीर शर्मा ने 50 लाख लोन लिया था, इसमें 37 लाख रुपये चुकाने हैं।

वहीं, पूर्व स्वास्थ मंत्री कौल सिंह ठाकुर ने घर बनाने के लिए 19 लाख रुपये लिये थे, जिसमें 14 लाख बचे हैं, वहीं, मोटर-कार के लिए उन्होंने 30 लाख लिये थे, जिसमें 20 लाख बकाया है। बल्ह से कांग्रेस नेता और पूर्व विधायक प्रकाश चौधरी ने भी घर बनाने के लिए 36 लाख लिए थे, जिसमें 26 लाख अभी चुकाने हैं। मौजूदा भाजपा अध्यक्ष सतपाल सिंह सत्ती ने भी घर बनाने के लिए 20 लाख लिये थे, जिसमें 10 लाख बकाया है। महेश्वर सिंह ने 37 लाख लोन लिया है और 27 लाख बकाया है।

वैसे लोन देते वक्त इस पैसे को विधायकों की सैलरी और पूर्व विधायकों की पेंशन से काटे जाने का प्रावधान बताया जाता है। हालांकि, जो लंबे समय से पैसे का भुगतान नहीं कर रहे हैं, उन्हें लेकर कार्रवाई का अधिकार विधानसभा सचिवालय को ही है। लेकि जब विधानसभा सचिवालय ही मौन हो जाये तो क्या होगा।
वैसे नियमों के तहत सभी विधायक 50 लाख रुपये तक एडवांस लेने के लिए पात्र हैं और पूर्व विधायक को 15 लाख रुपये कर्ज दिया जा सकता है। अगर किसी विधायक या पूर्व विधायक की लोन चुकाए बगैर ही मौत हो जाती है तो उस स्थिति में अगर राज्यपाल संतुष्ट है कि संबंधित परिवार कर्ज नहीं चुका सकता, तब बाकी बचे लोन को माफ भी किया जा सकता है। सवाल यह है कि इतना भारी भरकम कर्ज जनता की गाढ़ी कमाई से दिया जाता है, जबकि आम लोगों को कर्ज देती बार भी कई बहाने किए जाते हैं।



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