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कूट्टू से फिट बनेगा इंडिया, डायबिटीज से मिल सकती है निजात, सरकार दे रही परंपरागत खेती को बढ़ावा

khaskhabar.com : सोमवार, 30 दिसम्बर 2019 11:39 AM (IST)
कूट्टू से फिट बनेगा इंडिया, डायबिटीज से मिल सकती है निजात, सरकार दे रही परंपरागत खेती को बढ़ावा
नई दिल्ली। खान-पान की बदलती आदतों और कामकाज की आपाधापी में सेहतमंद बने रहने के लिए भोजन में उन खाद्यान्नों का चयन करना लाजिमी है जो आपको तंदुरुस्त रख सकता है। इनमें बक्वीट यानी कूट्टू काफी फायदेमंद अनाज है जिससे मधुमेह जैसी बीमारी से निजात मिल सकती है। यही कारण है कि केंद्र सरकार बक्वीट की खेती को बढ़ावा दे रही है। डॉक्टर बताते हैं कि बक्वीट में मैग्नीशियम, विटामिन-बी, आयरन, कैल्शियम, फॉलेट, जिंक, कॉपर, मैग्नीज और फासफोरस भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं।

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री कैलाश चौधरी की माने तो फिट इंडिया के लिए बक्वीट जैसे प्रोटीनयुक्त खाद्यान्नों का सेवन जरूरी है। उन्होंने कहा कि यही कारण है कि केंद्र सरकार परंपरागत खेती को बढ़ावा दे रही है। उन्होंने कहा कि फिट इंडिया का लक्ष्य तभी पूरा होगा जब अपने भोजन में लोग मोटे अनाज खाना पसंद करेंगे, जिससे तंदुरुस्ती मिलेगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस साल राष्ट्रीय खेल दिवस (29 अगस्त) पर फिट इंडिया मूवमेंट लांच करते हुए कहा था कि न्यू इंडिया को फिट इंडिया बनाए रखने के लिए व्यक्ति, परिवार और समाज का स्वस्थ होना लाजिमी है, लेकिन फिट इंडिया तभी बनेगा जब लोग तंदुरुस्ती प्रदान करने वाले खाद्य पदार्थों का सेवन करेंगे। ऐसे में बक्वीट काफी लाभदायक और सेहतमंद भोजन साबित हो सकता है।

बक्वीट की पैदावार बढ़ाने की दिशा में सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों को लेकर संसद के शीतकालीन सत्र में लोकसभा सदस्य डॉ. सुभाष रामराव भामरे और डॉ. डी.एन.वी. सेंथिलकुमार के सवालों का जवाब देते हुए कृषि मंत्रालय द्वारा दिए लिखित जवाब में बताया गया कि वर्ष 2018-19 से राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के तहत मोटे अनाज की पैदावार को बढ़ावा देने के लिए चलाए जा रहे कार्यक्रम को देश के 14 राज्यों के 202 जिलों में लागू किया गया है।

परंपरागत कृषि विकास योजना (पीकेवीआई) और मिशन ऑर्गेनिक वैल्यू चेन डेवलपमेंट फॉर नॉर्थ इस्टर्न रीजन के तहत भारत सरकार विभिन्न योजनाओं के जरिए जैविक खेती को बढ़ावा दे रही है। पीकेवीवाई के तहत तीन साल के लिए 50000 रुपए प्रति हेक्टेयर की दर से सहायता प्रदान की जाती है जिसमें से 31000 रुपए किसानों को बायो फर्टिलाइजर्स, बायो पेस्टिसाइड्स, वर्मीकंपोस्ट, बोटेनिकल एक्सट्रैक्ट आदि के लिए डीबीटी के जरिए सीधा हस्तांतरण किया जाता है।

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