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Oct 16, 2019 1:50 pm
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मप्र में भाजपा को फिर ‘भगीरथ’ की तलाश

khaskhabar.com : गुरुवार, 04 अप्रैल 2019 1:37 PM (IST)
मप्र में भाजपा को फिर ‘भगीरथ’ की तलाश
भोपाल। विपक्ष को ऐन वक्त पर पटखनी देने में माहिर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) आगामी लोकसभा चुनाव में मध्य प्रदेश में एक बार फिर कांग्रेस के हौसले पस्त करने की रणनीति बना रही है। भाजपा इस चुनाव में भी पिछले चुनाव की तरह कांग्रेस के घोषित उम्मीदवार से पाला बदलवा कर परिणाम से पहले ही मनोवैज्ञानिक जीत हासिल करने की जुगत में है।

आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर भाजपा की ओर से अब तक 18 और कांग्रेस की तरफ से नौ उम्मीदवारों की घोषणा हो चुकी है। दोनों ही दल तमाम स्तरों पर नाप-तौल कर शेष उम्मीदवारों का चयन करने की प्रक्रिया से गुजर रहे हैं।

भाजपा सूत्रों का कहना है कि पार्टी का जोर जाहिर तौर पर जिताऊ उम्मीदवारों पर है। इसके लिए भाजपा ने अब तक जिन सीटों के लिए उम्मीदवार घोषित नहीं किए हैं, उनके लिए पार्टी के संभावित नामों के साथ कांग्रेस के असंतुष्टों और पाला बदलने के लिए बैठे लोगों पर नजर गड़ाए हुए हैं।

पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा ने ऐसा करतब कर दिखाया है। भिंड में हुए दल बदल ने हर किसी को चौंका दिया था। कांग्र्रेस ने डॉ. भागीरथ प्रसाद को उम्मीदवार घोषित किया था। फॉर्म बी भी पार्टी की ओर से भेज दिया गया था, मगर डॉ. भागीरथ प्रसाद नामांकन भरने के एक दिन पहले कांग्रेस छोडक़र भाजपा में शामिल हो गए। भाजपा ने उन्हें उम्मीदवार बनाया। भागीरथ प्रसाद चुनाव जीत गए।

भागीरथ ही नहीं, भाजपा ने होशंगाबाद से कांग्रेस के सांसद उदय प्रताप सिंह से भी 2014 में चुनाव से पूर्व दल बदल करा लिया था। उदय प्रताप सिंह वर्तमान में भाजपा के सांसद हैं।

इससे बड़ा झटका भाजपा ने कांग्रेस को वर्ष 2013 में दिया था। विधानसभा में कांग्रेस की ओर से शिवराज सिंह चौहान सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था, और तत्कालीन उप नेता प्रतिपक्ष चौधरी राकेश सिंह ने विधानसभा में ही अविश्वास प्रस्ताव पर सवाल उठाकर भाजपा को कवच प्रदान किया था। कांग्रेस विधायक के रवैए के कारण ही अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा नहीं हो पाई थी। बाद में राकेश सिंह भाजपा में शामिल हो गए। इससे कांग्रेस की जमकर किरकिरी हुई थी।

राजनीतिक विश्लेषक शिव अनुराग पटेरिया कहते हैं, ‘‘राजनीति में जब चुनाव जीतना ही सबसे बड़ा आधार बन जाए तो कुछ भी संभव है। बीते एक दशक पर नजर दौड़ाई जाए तो एक बात साफ है कि कांग्रेस के कई दावेदारों ने भाजपा का दामन थामा है। संजय पाठक, नारायण त्रिपाठी ने कांग्रेस छोड़ी और बाद में भाजपा के विधायक बने। इससे पहले भागीरथ प्रसाद व उदय प्रताप सिंह भाजपा से सांसद बने। अब कांग्रेस के कई नेता भाजपा के संपर्क में है, वहीं भाजपा के नेता भी कांग्रेस में जाने को तैयार हैं। दल बदल कराने में कांग्रेस से भाजपा ज्यादा माहिर है।’’

भाजपा सूत्रों का दावा है कि इस बार के लोकसभा चुनाव से पहले भिंड का घटनाक्रम दोहराया जा सकता है। भाजपा की उन ‘भागीरथों’ पर नजर है, जो कांग्रेस से नाखुश हैं और जिनका जनाधार अच्छा है।

देखना अब यह है कि भाजपा के लिए कांग्रेस से कौन-कौन ‘भगीरथ’ बनता है।

राज्य में लोकसभा की 29 सीटें है, जिनमें से 26 पर भाजपा का कब्जा है। तीन सीटें कांग्रेस के पास हैं। छिंदवाड़ा से कमलनाथ, गुना से ज्योतिरादित्य सिंधिया और रतलाम से कांतिलाल भूरिया कांग्रेस के सांसद हैं।

(आईएएनएस)

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