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सपा, बसपा और कांग्रेस की कम अंतर से जीती सीटों पर भाजपा की पैनी नजरें

khaskhabar.com : गुरुवार, 20 जनवरी 2022 12:14 PM (IST)
सपा, बसपा और कांग्रेस की कम अंतर से जीती सीटों पर भाजपा की पैनी नजरें
लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए बिगुल बज चुका है। 10 फरवरी से पहले चरण का मतदान होगा। इसके लिए सभी राजनीतिक दलों की सेना तैयार हैं। भाजपा ने सत्ता पर फिर से दावा बरकरार रखने के लिए सपा, बसपा और कांग्रेस से कम अंतर से हारी सीटों के लिए खास रणनीति बनाकर उन पर पैनी नजर गड़ा रखी है। भाजपा ने पहले ही ऐसे खास क्षेत्रों में प्रभारी नियुक्त कर हर समीकरण साधने की कोशिश की रणनीति तैयार कर ली थी। इस रणनीति में उन सीटों पर खास फोकस किया गया, जहां पार्टी पांच हजार से कम मतों के अंतर से हारी थी। ऐसी सीटों पर सांसदों के साथ निगम, आयोग और बोडरें के अध्यक्षों को जिम्मेदारी दी गयी है। प्रभारियों की तैनाती में जातीय समीकरणों को तवज्जो दिया गया। प्रभारियों को हर महीने सीटों का दौरा कर वहां विशेष योजना बनी है। सरकार और संगठन की रिपोर्ट के आधार पर पार्टी ने वहां काम शुरू किया।

इन विधानसभा क्षेत्रों में प्रवासी कार्यकर्ता, वरिष्ठ प्रचारक सोशल मीडिया के विशेषज्ञ प्रवास कर रहे हैं और भाजपा का माहौल बनाने में जुटे हैं।

सपा, बसपा और कांग्रेस ने जिन सीटों पर एक हजार से लेकर पांच या 10 हजार के अंतर से जीत हासिल की थी, उन सभी सीटों पर अपना वर्चस्व बनाने के लिए भाजपा ने विशेष योजना की है। खासकर पश्चिम यूपी की कैराना सीट, जहां वर्ष 2017 के चुनावों में भाजपा दूसरे नम्बर पर थी और मात्र 21162 वोटों से पीछे रह गई थी। यहां माफियाराज और गुंडागर्दी के खात्मे जैसे मुद्दों पर जोर दिया जा रहा है। इस सीट से मृगांका सिंह को पूरी मजबूती के साथ भाजपा ने मैदान में उतारा है।

इसी तरह से मेरठ में सपा के रफीक अंसारी के खिलाफ चुनाव लड़े भाजपा के डॉ. लक्ष्मीकांत बाजपेई 28769 वोटों से पिछड़ गये थे। वहां से इस बार भाजपा ने कद्दावर कमल दत्त शर्मा को उम्मीदवार बनाया है। इसी तरह से जिन विधानसभा क्षेत्रों में पांच हजार से अधिक के मार्जिन से भाजपा विपक्षी पार्टियों से पीछे रह गई थी वहां भी भाजपा का प्रदेश नेतृत्व विशेष ध्यान दे रहा है। सहारनपुर में 2017 में भाजपा के प्रत्याशी दूसरे स्थान पर रहे थे और अंतिम राउंड की मतगणना में 4636 वोटों से सपा प्रत्याशी ने जीत हासिल की थी। इस बार वहां से भाजपा ने राजीव गुम्बर पर अपना दांव लगाया है। इसी प्रकार नजीबाबाब में जहां भाजपा के राजीव कुमार अग्रवाल मात्र 2002 वोटों से पीछे रहे गये थे, वहां से इस बार पार्टी ने कुंवर भारतेन्दु सिंह को आजमाया है।

महमूदाबाद सीट पर भाजपा नें जीत हासिल करने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। पिछली बार यहां भाजपा दूसरे नंबर पर रही थी और हार का अंतर केवल 1906 वोट था। इसी प्रकार कम अंतर वाली सभी सीटों पर भाजपा ने अलग रणनीति बनाई है। ऊंचाहार की सीट से भी भाजपा ने अलग रणनीति बनाई है। यहां से उत्कृष्ट मौर्य 1934 वोटों से अंतिम राउंड में पिछड़ गये थे। कन्नौज में भाजपा विपक्षी दलों के प्रत्याशी को शिकस्त देने के लिए जी-जान से जुटी है। पिछले चुनावों में यहां भाजपा के बनवारी लाल दोहरे मात्र 2454 वोटों से जीत हासिल नहीं कर पाए थे। इस बार इस सीट को अपने खेमे में लाने की भरपूर तैयारी भाजपा कर रही है।

बसपा की जीती हुई विधानसभा सीटों के लिए भाजपा ने अलग तैयारी की है। बसपा कार्यकाल से भाजपा सरकार में कराए गए विकास कार्यों को जन-जन तक पहुंचाया जा रहा है। इसके अलावा दलितों के लिए हुए कार्यों का बखान हो रहा है। जलालपुर, रसारा, धौलना, प्रतापपुर, चिल्लूपार और लालगंज सीटें प्रमुख हैं, यहां पर भाजपा नम्बर दो की लड़ाई में रही है।

भाजपा के वरिष्ठ कार्यकर्ता ने बताया कि इन सभी सीटों पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, डॉ. दिनेश शर्मा और प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने अगस्त से दिसंबर 2021 के बीच यहां सभाएं कीं। इन क्षेत्रों की समस्याओं के समाधान और विकास पर जोर दिया गया। एक-एक विधानसभा क्षेत्र में 500 से 700 करोड़ रुपये तक की विकास परियोजनाओं का लोकार्पण, शिलान्यास कर चुके हैं। इन सीटों पर लाभार्थियों से संपर्क को बढ़ाया जा रहा है।

--आईएएनएस

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