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बैरकपुर : तृणमूल के त्रिवेदी को भाजपा के अर्जुन से मिल रही कड़ी चुनौती

khaskhabar.com : सोमवार, 06 मई 2019 2:44 PM (IST)
बैरकपुर : तृणमूल के त्रिवेदी को भाजपा के अर्जुन से मिल रही कड़ी चुनौती
बैरकपुर (पश्चिम बंगाल)। तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार और पूर्व रेलमंत्री दिनेश त्रिवेदी को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार अर्जुन सिंह से कड़ी चुनौती मिल रही है।

क्षेत्र में 35-40 फीसदी मतदाता ऐसे हैं जो बंगाली नहीं हैं। ऐसे में आक्रामक और धुआंधार प्रचार कर रहे भाजपा उम्मीदवार अर्जुन सिंह एक अच्छे विकल्प के रूप में सामने आ रहे हैं।

हालांकि अनुभवी त्रिवेदी ने भाटपारा से तृणमूल के पुराने विधायक सिंह को तवज्जो नहीं देते, जो बाद में भाजपा में शामिल हो गए।

त्रिवेदी ने कहा, ‘‘लोग बंदूक की जगह कलम को चुनेंगे। कोई भी ऐसे माफिया के लिए वोट नहीं करेगा, जिस पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की लगभग सभी धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज हो। चुनाव विकास के लिए होते हैं और लोग हमारी पार्टी द्वारा राज्य में किए गए विकास के मुद्दे पर हमें वोट करेंगे।’’

उन्होंने कहा कि वर्ष 2009 में लोगों ने माकपा उम्मीदवार तरित बरन तोपदार को हराकर ‘जबरन वसूली और माफिया राज’ के खिलाफ उन्हें जिताया था। वर्ष 2014 में उनके द्वारा किए गए विकास कार्य को देखकर यह सीट लोगों ने उन्हें इनाम के तौर पर दी थी।

इससे पहले दशकों से यह सीट माकपा का गढ़ रही।2009 में त्रिवेदी ने यहां से छह बार के सांसद रहे तोपदार को 56,000 वोटों के बड़े अंतर से हराकर इस पर कब्जा किया था।

त्रिवेदी ने 2012 में अपने प्रस्तावित यात्री किराया वृद्धि पर पार्टी के भीतर एक दरार के बाद रेल मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया था।

2014 के चुनाव में त्रिवेदी ने माकपा की सुभाषिनी अली को दो लाख से अधिक मतों के अंतर से हराकर सीट बरकरार रखी। बीजेपी के उम्मीदवार, सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी रुमेश कुमार हांडा तीसरे स्थान पर रहे।

2014 में तृणमूल के पदाधिकारी और त्रिवेदी की सीट के कार्यवाहक प्रभारी अर्जुन सिंह ने कहा, ‘‘मैं 200 प्रतिशत आश्वस्त हूं कि मैं यह चुनाव जीत रहा हूं क्योंकि तृणमूल ने मेरे निर्वाचन क्षेत्र से त्रिवेदी को मैदान में उतारा है। वह यहां लोकप्रिय नहीं हैं। लोग शायद ही उन्हें जानते हैं। जब मैं तृणमूल में था, तो मैंने उनकी जीत सुनिश्चित की। मुझे लगता है कि त्रिवेदी इस बार तीसरे स्थान पर रहेंगे। माकपा दूसरे स्थान पर होगी।’’

राजनीतिक विश्लेषक बिमल शंकर नंदा ने महसूस किया कि पिछली बार त्रिवेदी की जीत में सिंह की भूमिका थी क्योंकि उनके पास ‘एक जन-आधार और मजबूत संगठनात्मक ताकत’ है।

उन्होंने आईएएनएस से कहा, ‘‘जब तृणमूल राज्य में 2006 के विधानसभा चुनाव में हार गई थी तब उपचुनाव में भाटपारा से अर्जुन सिंह ने जीत हासिल की थी। अर्जुन निश्चित तौर पर एक करिश्माई नेता हैं, उन्होंने 2014 के चुनावों में तृणमूल की जीत सुनिश्चित की थी।’’
(आईएएनएस)

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