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बाग प्रिंट को 'वोग इटालिया' पत्रिका में जगह मिलने से मिली नई पहचान

khaskhabar.com : शुक्रवार, 02 अप्रैल 2021 2:00 PM (IST)
बाग प्रिंट को 'वोग इटालिया' पत्रिका में जगह मिलने से मिली नई पहचान
धार। मध्य प्रदेश के धार जिले के बाग प्रिंट को तो वैसे पूरी दुनिया में पसंद किया जाता है, लेकिन डिजाइनिंग की दुनिया में खास पहचान रखने वाली वोग इटालिया के डिजिटल एडिशन में जगह मिलने के बाद इस प्रिन्ट को नई पहचान मिली है। यहां की प्रिंटिंग में सीता की साड़ी पहने तस्वीरें फैशन की दुनिया में इन दिनों खासी चर्चा में है।

धार जिले के बाग गांव से शुरू हुई कपड़ों पर प्रिंट की इस परंपरा को बाग प्रिंट के नाम से पहचाना जाता है। बाग प्रिंट की साड़ी , सलवार-सूट, चादर का काफी लोकप्रियता है। इसमें पूरी तरह प्राकृतिक रंगों से ब्लाक छपाई की जाती है। मूल तकनीक को बरकरार रखते हुए, इस प्रिंट में मूल रूप से फूलों और ज्यामितीय पैटर्न का इस्तेमाल किया जाता है। इनमें से बहुत सारे प्रिंट अब बेड शीट, टेबल कवर, साड़ी, और कुशन कवर पर इस्तेमाल किए जा रहे हैं ।

इस जिले के स्व-सहायता समूह द्वारा तैयार बाग प्रिंट की साड़ियां बनाई जा रही है। भारत सरकार की योजना में एक जिला-एक उत्पाद योजना में बाग प्रिंट का चयन किया गया है। यहां बनी साड़ी को जब स्व-सहायता समूह की लड़कियांे ने पहना तो उनमें से सीता की तस्वीर को वोग इटालिया के डिजिटल एडिशन में जगह मिल गई। उसके बाद से बाग प्रिंट की पूरी दुनिया में चर्चा है।

वोग इटालिया वो मैग्जीन है जिसमें देश और दुनिया के डिजाइनिंग जगत से जुड़े लोगों का स्थान पाना एक सपना होता है। इसमें बाग पिंट्र को मिली जगह ने जहां इस कला की समृद्धि और संरक्षण के काम में लगे लोगों की हौसला अफजाई होगी वहीं सीता को दुनिया में नया मंच मिला है।

वर्तमान में जिले के बाग एवं कुक्षी विकासखंड में आजीविका मिशन से जुडे आठ समूह के 58 सदस्य बाग प्रिंट के कार्य से जुड़े हुए है। प्रिंट का प्रमोशन कंपनी बनाकर किया जा रहा है। कंपनी को अपराजिता स्वयं-सेवी संगठन द्वारा तकनीकी सहयोग दिया जा रहा है। समूह सदस्यों के परिवार कंपनी के शेयर होल्डर हैं। अब क्लस्टर गतिविधि में कलाकारों को एकसाथ जोड़कर बाग प्रिंट हब का निर्माण भी बाग विकासखण्ड में प्रस्तावित है।

बाग प्रिंट की साड़ी, सलवार सूट, चादर आदि पर विभिन्न डिजाइन को उकेरने में पूरी तरह प्राकृतिक और वनस्पति रंगों का उपयोग किया जाता है। यहां आदिवासी शिल्पकारों को, विशेष रूप से महिला स्व-सहायता समूहों की महिलाओं को, रोजगार उपलब्ध कराने के लिए भारत सरकार की योजना के अंतर्गत विशेष क्लस्टर विकास की पौने तीन करोड़ रुपए की परियोजना तैयार की गई है। परियोजना के लिए साढ़े सात हेक्टेयर भूमि आवंटित की गयी है।

स्थानीय जानकारों की मानें तो बाग प्रिंट को देश के साथ दुनिया में भी पहचान मिल रही है। इसके लिए कई स्थानों पर आउटलेट भी खोले जा रहे है। सरस मेला, हस्त शिल्प मेला में स्व सहायता समूहों की भागीदारी बढ़ाई जा रही है। वहीं वोग इटालिया पत्रिका में बाग प्रिंट की साड़ी पहने सीता की तस्वीर आने से दुनिया की नजरों में बाग प्रिंट खास जगह बनाएगा, जिसका लाभ यहां के कारोबारियों और कारोबार को होगा। इसका साथ,

मार्केट प्रमोशन के लिए समूहों को स्थानीय बाजार के साथ प्रदेश एवं देश के अन्य शहरों से भी जोड़े जाने की योजना पर भी काम हो रहा है।

--आईएएनएस

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