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पीढ़ी के अंतर को संवेदनशील तरीके से पेश करती है फिल्म 'जून'

khaskhabar.com : मंगलवार, 29 जून 2021 5:48 PM (IST)
पीढ़ी के अंतर को संवेदनशील तरीके से पेश करती है फिल्म 'जून'
फिल्म में कामुकता को लेकर भी छोटे शहर की मानसिकता को करीब से दिखाया गया है। नील की प्रेमिका अपने पिता के रेजर से अपने अनचाहे बाल काटने की कोशिश करती है और इस दौरान उसे कट लग जाता है और वह खुद को नुकसान पहुंचा लेती है, क्योंकि नील ने उसे कहा था कि वह एक भालू की तरह है और वह उसके साथ यौन संबंध रखने के विचार से नफरत करता है।

इसके अलावा सेक्स और अंतरंग होने जैसे विषय पर एक और संकोच से भरी प्रतिक्रिया देखने को मिलती है, जब नील के सबसे अच्छा दोस्त प्रीतेश (सौरभ पचौरी) को एक लड़की उसे चूमने के लिए कहती है। इस ²श्य में प्रीतेश लज्जा महसूस करता हुआ दिखाई देता है। इस तरह के ²श्य फिल्म में भावनाओं को उच्च स्तर पर उजागर करते हुए प्रतीत होते हैं, जो कि कहानी को जीवंत बना देते हैं।

इसके साथ ही फिल्म में कुछ खामियां भी देखी जा सकती है। कुछ नायक (जायसवाल के दिमाग में आते हैं) को कोई आर्क नहीं मिलता है और वे काले और सफेद चरित्र चित्रण के दायरे में आते हैं। नील के पिता के मामले में, अंत में उसका हृदय परिवर्तन बहुत अचानक और फिल्मी लगता है। फिल्म का समग्र उदास मिजाज हो सकता है सभी को ठीक न लगे, हालांकि पटकथा के लिहाज से यह आवश्यक भी था। मगर कुछ के लिए यह असुविधाजनक हो सकता है, मगर इसमें कई क्षण भावुकता और राहत भरे भी देखने को मिलते हैं।

कुल मिलाकर फिल्म जून, जो भी कहती है, वह प्रासंगिक जरूर लगता है। मजबूत कलाकारों द्वारा संचालित, यह फिल्म भारत में ओटीटी संस्कृति के उदय से प्रेरित आत्मनिरीक्षण सिनेमा की एक नई लहर का प्रतिनिधित्व करती है, जो कि ऐसी बातचीत शुरू करने में संकोच नहीं करती है, जिसे कुछ समय पहले भी वर्जित समझा जाता था। (आईएएनएस)

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