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ब्रेन ट्यूमर का इलाज संभव, बचने के लिए इन अहम बातों का रखें ध्यान

khaskhabar.com : बुधवार, 08 जून 2022 1:22 PM (IST)
ब्रेन ट्यूमर का इलाज संभव, बचने के लिए इन अहम बातों का रखें ध्यान
ब्रेन ट्यूमर मस्तिष्क में होने वाली असामान्य कोशिकाओं का एक संग्रह है। जब ट्यूमर बढ़ता है, तो इससे खोपड़ी के अंदर दबाव बढ़ सकता है। यह स्थिति मस्तिष्क को क्षति पहुंचाती है और खतरनाक हो सकती है। शरीर में अलग-अलग तरह के ब्रेन ट्यूमर होते हैं जैसे कुछ ब्रेन ट्यूमर कैंसर-रहित (नॉन-कैंसरस या बिनाइन) होते हैं और कुछ ब्रेन ट्यूमर कैंसर वाले (कैंसरस या मेलिग्नंट) होते हैं। नारायणा मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल, जयपुर के न्यूरोसर्जन, डॉ सुरेंद्र सिंह धायल बताते हैं की या तो ब्रेन ट्यूमर मस्तिष्क में शुरू होता है जिसे प्राथमिक ब्रेन ट्यूमर कहा जाता है, या कैंसर शरीर के अन्य भागों में शुरू हो सकता है और मस्तिष्क में फैल सकता है - जिसे सेकेंडरी या मेटास्टेटिक ब्रेन ट्यूमर कहा जाता है।

डॉ. सुरेंद्र धायल ने बताया कि अलग-अलग मामलों में ब्रेन ट्यूमर के संकेत और लक्षण भिन्न हो सकते हैं। यह ब्रेन ट्यूमर के आकार, स्थान और बढ़ने की दर पर निर्भर करते हैं। कई बार बिना किसी लक्षण के भी व्यक्ति को ब्रेन ट्यूमर की समस्या हो सकती है। डॉ. सुरेंद्र सिंह धायल के अनुसार ब्रेन ट्यूमर में निम्न संकेत व लक्षण शामिल होते हैं जैसे कि बार-बार सिरदर्द होना ब्रेन ट्यूमर का एक आम लक्षण है, सिरदर्द का धीरे-धीरे गंभीर होते जाना, बिना किसी कारण के उल्टी और मतली आना, धुंधला दिखाई देना, दोहरा दिखाई देना, दूर की नजर कमजोर होना, हाथ व पैर के संचालन व संवेदनशीलता में लगातार कमी आना, शरीर का संतुलन बिगड़ना, उलझन, व्यवहार में परिवर्तन आना, थकान होना, सुस्ती आना, शॉर्ट टर्म मैमोरी लॉस, बोलने या समझने में कठिनाई, नींद न आना, दैनिक गतिविधियों व उनको करने की क्षमता में बदलाव आना आदि।

नारायणा मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल, जयपुर के सीनियर न्यूरोसर्जन डॉ. के के बंसल ने बताया की ब्रेन ट्यूमर होने के जोखिम को बढ़ाने वाले कुछ कारकों की पहचान की जा चुकी है, जैसे बढ़ती आयु, रेडिएशन का दुष्प्रभाव, कैंसर का पारिवारिक इतिहास और एच.आई.वी या एड्स होना।

ब्रेन ट्यूमर कैसे व क्यों होता है इस पर सीनियर न्यूरोसर्जन डॉ. के. के. बंसल ने बताया की उम्र बढ़ने के साथ ब्रेन ट्यूमर होने का खतरा बढ़ सकता है। वृद्ध व्यक्तियों में ब्रेन ट्यूमर होना सबसे आम है। हालांकि, ब्रेन ट्यूमर किसी भी उम्र में हो सकता है। कुछ प्रकार के ब्रेन ट्यूमर तो केवल बच्चों में ही पाए जाते हैं।
रेडिएशन का एक्सपोज़र - जिन लोगों को ’आयोनिजिंग रेडिएशन’ नामक एक खास रेडिएशन का एक्सपोज़र हुआ हो, उनमें ब्रेन ट्यूमर का खतरा बढ़ जाता है। आयोनिजिंग रेडिएशन होती है सिर पर एक बड़ी मशीन से विकिरण चिकित्सा करवाना जैसे कि कैंसर के इलाज में की जाती है।
पारिवारिक इतिहास - यदि आपके परिवार के किसी सदस्य को पहले कभी ब्रेन ट्यूमर की समस्या रही हो, तो आपके मस्तिष्क में ब्रेन ट्यूमर होने की संभावना काफी हद तक बढ़ जाती है।
पहले कैंसर होना - कैंसर से पीड़ित बच्चों को अपने बाद के जीवनकाल में ब्रेन ट्यूमर होने का अधिक खतरा रहता है। जिन वयस्कों को ल्यूकेमिया (रक्त कैंसर) होता है, उनमें भी इसके होने का खतरा रहता है।
एच.आई.वी-एड्स - सामान्य जनसंख्या की तुलना में, यदि आपको एचआईवी या एड्स है तो आपको ब्रेन ट्यूमर होने की संभावना अधिक होती है।

ब्रेन ट्यूमर के निदान के बारे में डॉ. के.के. बंसल बताते हैं कि यदि आपको ब्रेन ट्यूमर से जुड़े किसी भी प्रकार के लक्षण महसूस होते हैं तो ऐसी स्थिति में आप डॉक्टर से तुरंत शारीरिक परीक्षण लें जैसे न्यूरोलॉजिक परिक्षण, एमआरआई, सीटी स्कैन, स्पाइनल टैप और ज़रूरत होने पर बॉयोप्सी करवा, जल्द से जल्द इलाज़ कराना चाहिए।

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