Scientific analysis of the multifaceted utility of Guduchi included in the house-to-house medicine scheme -m.khaskhabar.com
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घर-घर औषधि योजना में सम्मिलित गुडूची की बहुआयामी उपयोगिता का वैज्ञानिक विश्लेषण

khaskhabar.com : गुरुवार, 03 जून 2021 2:37 PM (IST)
घर-घर औषधि योजना में सम्मिलित गुडूची की बहुआयामी उपयोगिता का वैज्ञानिक विश्लेषण
हाल ही में राजस्थान सरकार ने औषधीय पौधों के उपयोग को प्रोत्साहित करने के लिये “घर-घर औषधि योजना” की घोषणा किया है। इसके अंतर्गत तुलसी, गिलोय, अश्वगंधा और कालमेघ जैसे पौधे वन विभाग की पौधशालाओं में उगाने और इन्हें लोगों को अपने घर में जाने के लिये प्रोत्साहित किया जायेगा| यह अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रमाण-आधारित कदम है| आज गुडूची या गिलोय (टीनोस्पोरा कार्डीफोलिया) की बहुआयामी उपयोगिता का वैज्ञानिक विश्लेषण है| गुडूची को आब-ए-हयात के नाम से भी जाना जाता है।

औषधि के रूप में गुडूची के बारे में उपलब्ध प्रमाणों को तीन तरह से देखा जा सकता है| एक तरफ स्थानीय आदिवासियों द्वारा स्थानीय ज्ञान का प्रयोग कर विभिन्न प्रकार के रोगों के विरुद्ध गुडुची का प्रयोग पूरे देश में वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं द्वारा एथनोमेडिसिनल या लोक-औषधीय जानकारी प्रकाशित की गयी है। दूसरी तरफ आयुर्वेद की संहिताओं में गुडूची को विभिन्न रोगों के विरुद्ध प्रभावी होने की जानकारी अंकित है| इसके साथ ही आधुनिक वैज्ञानिक शोध की विधियों -इन सिलिको, इन वाइट्रो, इन वाइवो एवं क्लिनिकल ट्रायल्स – में भी गुडूची की विभिन्न रोगों के विरुद्ध क्रियात्मकता सिद्ध हुई है। हाल ही में एक डॉकिंग अध्ययन में गुडूची में पाये जाने वाले अनेक द्रव्यों में से 27 की जांच करने पर पाया गया कि टिनोकॉर्डिसाइड की बाइंडिंग एनर्जी 8.10 केकैल/मोल. है| इस प्रकार यह कोविड-19 के विरुद्ध मज़बूत औषधि हो सकती है| अभी तक गुडूची के कोविड-19 के सन्दर्भ में 122 शोधपत्र प्रकाशित हो चुके हैं।

अनुभवजन्य प्रमाण तथा प्रीक्लिनिकल अध्ययन स्पष्ट करते हैं गुडुची, अश्वगंधा, आमलकी आदि रसायन द्रव्य बी और टी सेल के प्रसार, एन.के. सेल को सक्रिय करने, टीएच1 के सेलेक्टिव अपरेगुलेशन, सीडी4+ व सीडी8+ की संख्या में वृद्धि करने, और आईएल-1बी और आईएल-6 में कमी लाने में मदद करती हैं। इस प्रकार ये सब नॉन-स्पेसिफिक इम्यूनिटी को मजबूत करने और संक्रमण को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं (देखें, बी. पटवर्धन, आर. सरवाल, जर्नल ऑफ़ आयुर्वेदा एंड इंटीग्रेटिव मेडिसिन, 12(2), 227-228, 2021)। देश के अनेक अस्पतालों में चल रहे क्लिनिकल ट्रायल्स के परिणाम भी उत्साहजनक और प्रभावी रहे हैं और शीघ्र ही प्रकाशित होने वाले हैं।

आयुर्वेद की संहिताओं में उपलब्ध जानकारी की बात करते हैं। उम्र को रोके रहने वाले या वयःस्थापक द्रव्यों में गुडूची शामिल है। इस वर्ग की अन्य प्रजातियाँ हरीतकी, आँवला, रास्ना, अपराजिता, जीवन्ती, अतिरसा (शतावरी), मंडूकपर्णी, शालपर्णी, व पुनर्नवा हैं (च.सू.4.18): अमृताऽभयाधात्रीमुक्ताश्वेताजीवन्त्यतिरसामण्डूकपर्णीस्थिरापुनर्नवा इति दशेमानि वयःस्थापनानि भवन्ति। इसके अतिरिक्त एकल या अकेली गुडूची का भी अनेक बीमारियों के विरुद्ध प्रयोग किया जाता है। आचार्य भावमिश्र ने स्पष्ट किया है कि गुडूची कटु, तिक्त, कषाय रस युक्त, लघु, उष्ण है| यह बल्य, रसायन, अग्निदीपक और त्रिदोषशामक है (भा.प्र.पू.ख. गुडुच्यादिवर्ग 6.8-10): गुडूची कटुका तिक्ता स्वादुपाका रसायनी। संग्राहिणी कषायोष्णा लघ्वी बल्याऽग्निदीपिनी।। दोष त्रयामतृड्दाहमेहकासांश्च पाण्डुताम्। कामला कुष्ठवातास्त्रज्वरक्रिमिवमीन्हरेत।। प्रमेहश्वासकासार्शः कृच्छ्रहृद्रोगवातनुत्।

आयुर्वेद की प्रमुख संहिताओं में 178 ऐसे जीवनदायी योग हैं जिनमें गुडूची प्रमुखता से प्रयुक्त होती है और शायद ही ऐसा कोई रोग हो जो इन योगों से न सम्हलता हो| गुडूची के मिश्रण वाले योगों का उपयोग टाइफाइड, नर्वस सिस्टम के रोग, तमाम तरह के टॉक्सिक और सेप्टिक बुखार, वातज, पित्तज और कफज ज्वर, रक्तस्राव, गठिया, गाउट, रूमेटिज्म, ऐसे बुखार जिनमें प्राय रक्त स्राव हो जाता है, उल्टी, जलन, दाह, मोटापा, अम्ल और पित्त बढ़ने के कारण होने वाली उल्टियां, चमड़ी के अनेक तरह के रोग, अल्सर, शोथ, यूरिनरी ट्रैक्ट से जुड़े रोग, फाइलेरियासिस, एंजाइना और वातज शूल, पित्तश्लेष्मिक ज्वर, वृष्य और वाजीकरण, याददाश्त बढ़ाना, आंखों और आंख से जुड़े तमाम रोग, उम्र बढ़ने को रोकना, बालों का पकना रोकना, बौद्धिक क्षमता बढ़ाना, शरीर का नवीनीकरण करना, फिस्टुला इन एनो सहित गुदा के तमाम रोग, अनेक प्रकार के कुष्ठ, ज्वाइंडिस, राइनाइटिस, साइनस, स्प्लीन का बढ़ना, जोड़ों का दर्द, ट्यूमर, एनीमिया, प्लीहा का बढ़ना, अग्नि को सम करना, बलवृद्धि, मनोविभ्रम की स्थिति ठीक करना, मिर्गी, विभिन्न वात विकार, जननांगों से जुड़ी हुई समस्यायें, सर्वाइकल लिम्फोडिनोमा, योनि-रोग ठीक करना, दीर्घायु-प्राप्ति, शरीर को कांतिवान बनाना, सियाटिका सहित कमर, पैरों और जांघों का दर्द, डिसपेप्सिया, सिरदर्द, माइग्रेन, दांत का दर्द जैसे अनेक चिकित्सकीय परिस्थितियों में होता है।


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