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Jun 20, 2019 1:43 pm
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IMA व दीपिका की संस्था ने की मेंटल है क्या के पोस्टर की आलोचना

khaskhabar.com : रविवार, 21 अप्रैल 2019 3:20 PM (IST)
IMA व दीपिका की संस्था ने की मेंटल है क्या के पोस्टर की आलोचना
मुंबई। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) और अभिनेत्री दीपिका पादुकोण की संस्था द लिव लव लाफ फाउंडेशन (टीएलएलएलएफ) ने शनिवार को कंगना रनौत और राजकुमार राव अभिनीति फिल्म मेंटल है क्या? के पोस्टर की आलोचना की। आईएमए के साथ इंडियन साइकियाट्रिक सोसाइटी (आईपीएस) ने फिल्म निर्माताओं से अपील की है कि फिल्म के शीर्षक को बदले तथा ट्रेलर को वापस लें।

आईएमए ने कहा कि टाइटल में जो मेंटल नामक शब्द है और जो कहने का अंदाज है, वह मानसिक रोग की परेशानियां झेल रहे लोगों की हंसी उड़ाता है और उनका अपमान करता है। आईएमए के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. शांतनु सेन का कहना है कि कई शोध बताते हैं कि भारत सहित दुनिया के सारे देश मानसिक रोगों से जुड़े कलंक (स्टिग्मा) से आज भी जूझ रहे हैं।

विशेषज्ञ लोगों को लगातार समझा रहे कि दुनिया में कोई मेंटल या पागल नहीं। वे सब किसी न किसी रोग से ग्रस्त हैं और यह न अपराध है न अभिशाप। इन रोगों का इलाज संभव है। कुछ बीमारियां क्रॉनिक होती हैं जो कि नियमित दवाओं और अन्य प्रकार की देखभाल से नियंत्रित रहती हैं। इंडियन साइकियाट्रिक सोसाइटी के अध्यक्ष डॉ.मृगेश वैष्णव का कहना है, मानव-अधिकारों के प्रति सजगता के इस दौर में मानसिक रूप से परेशान लोगों के अधिकारों की भी रक्षा होनी चाहिए।

अब तो हम पूरे व्यक्ति को बीमार बताने वाले टर्म मानसिक रोगी की जगह मानसिक रोग से ग्रस्त व्यक्ति कहने लगे हैं, क्योंकि मनोरोग व्यक्ति को पूरी तरह खारिज नहीं करते। मगर इस फिल्म का टाइटल व्यक्ति को पूरी तरह खारिज करता है- यह अनैतिक और अमानवीय ही नहीं अवैधानिक भी है। वैष्णव ने कहा, फिल्म निर्माता ने हाल ही में एक पोस्टर रिलीज किया है। उसमें नायक और नायिका आमने-सामने बैठकर अपनी सटी हुई जीभों के ऊपर एक नंगे ब्लेड को संतुलित करते दिखते हैं।

कमाल की कल्पना है। मगर क्या यह रचनात्मक भी है? इसकी कौनसी उपयोगिता है? सच्चाई तो यह है कि यह एक खतरनाक खेल खेलने की प्रवृत्ति का उदाहरण है। आज भारत में उद्दंडता (डिलिंक्वन्सी) और स्वयं को खतरों में नाहक डालने वाले व्यक्तित्व रोगों की वृद्धि हो रही है। नशाखोरी, जानलेवा सेल्फी लेना, तेज ड्राइविंग आदि इसके उदाहरण हैं। ऐसे में कुछ खतरनाक करने को उकसाता यह पोस्टर एक अपराध है। इसे रचनात्मक तो कतई नहीं माना जा सकता।

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