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May 14, 2021 1:15 pm
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क्या होता है पितृदोष व मातृदोष

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क्या होता है पितृदोष व मातृदोष
थोडा विस्तार में जाएं तो कुंडली में लग्न, द्वितीय, चतुर्थ, पंचम और दशम भाव में सूर्य ग्रह शनि व राहू के साथ हो तो पितृ दोष माना जाता है। हालांकि कुछ विद्वान सूर्य-केतु के संयोग को भी पितृ दोष की संज्ञा देते हैं।

इसके साथ ही सूर्य नीच का हो, शत्रु क्षेत्र में हो या उससे दृष्ट हो तो भी पितृ दोष बताया जाता है। ज्योतिष में पितृ दोष पर अत्यधिक जोर दिया जाता है। कारण, कुंडली में अकेला सूर्य दोषपूर्ण हो तो वह लाख दोषों के बराबर माना जाता है।

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