‘मैं टीम स्पर्धा के प्रदर्शन के बाद अपने फाउल को भूल गई थी’

आईएएएफ विश्व अंडर-20 चैम्पियनशिप में स्वर्ण जीत इतिहास रचने वाली हिमा ने कहा, मेरी किसी से कोई निजी दुश्मनी नहीं है। मैं अब उस विवाद को पीछे छोड़ देना चाहती हूं और अपने काम पर ध्यान देना चाहती हूं। आगे अभी ढेर सारे टूर्नामेंट होने वाले हैं और मैं उन पर अपना ध्यान लगाना चाहती हूं। मैं किसी ऐसे विवाद में नहीं पडऩा चाहती जिससे आगे के हालात मेरे लिए मुश्किल हो। यह पूछे जाने पर कि अब आपके पास तीन पदक हो गए हैं और अब क्या हासिल करना चाहती हैं, उन्होंने कहा, मैं पदक से ज्यादा अपने समय पर ध्यान देती हूं। मैं इसी लक्ष्य के साथ जकार्ता गई थी कि मुझे अपनी टाइमिंग में सुधार करना है। अगर आप समय में अच्छा करते हो तो पदक अपने आप जीत जाएंगे। कोच बहादुर सिंह का कहना है कि उनका अगला लक्ष्य सिर्फ और सिर्फ ओलम्पिक है। उन्होंने कहा कि इस दौरान जो भी टूर्नामेंट होंगे एथलीट उनमें भाग लेंगे लेकिन अपना सारा ध्यान ओलम्पिक पर लगाएंगे। यह पूछने पर कि कोच का लक्ष्य सिर्फ ओलम्पिक है और आपका क्या लक्ष्य है, हिमा ने कहा, मेरा लक्ष्य अपना सर्वश्रेष्ठ समय निकालना है। एशियाई खेलों में जो समय रहा है मैं उनमें सुधार करना चाहती हूं। मैं ओलम्पिक के लिए ही अपने समय में सुधार करना चाहती हूं ताकि वहां भी पदक जीतकर फिर से राज्य और देश के लोगों को गौरवान्वित कर सकूं। 4 गुणा 400 मिश्रित रिले को पहली बार एशियाई खेलों में शामिल किया गया था और इसकी अपनी तैयारियों को लेकर हिमा ने कहा, स्पर्धा कोई सी भी हो, एक एथलीट के लिए मानसिक रूप से खुद को तैयार रखना जरूरी है। फिनलैंड से लौटने के बाद मैंने अगले दिन से ही इसके लिए कड़ी मेहनत करनी शुरू कर दी थी। इसमें हिस्सा लेना काफी अच्छा अनुभव रहा। हिमा ने अब तक जीते गए अपने सभी पदक पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को समर्पित किए, जिनका पिछले महीने निधन हो गया था।
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