‘उनके मुताबिक मैं पदक नहीं जीत सकती थी लेकिन हार नहीं मानी’

स्वप्ना ने कहा, एशियाई चैम्पियनशिप और एशियाई खेलों के बीच में मैं चोटिल हो गई थी। इस दौरान मुझे बहुत चोट लगी हुई थी। मेरे टखने में चोट थी। इसके बावजूद मैं ट्रेनिंग करती थी। कैंप के दौरान मेरे दोस्तों तक ने मुझे नकार दिया था। उनके मुताबिक मैं पदक नहीं जीत सकती थी लेकिन मैंने हार नहीं मानी। उन्होंने कहा, मैंने जितना सुना, वह यह है कि वे लोग (मेरे दोस्त) कहते थे कि इसको लेकर जाएंगे तो क्या मिलेगा? ये पदक ला सकती है क्या? चोटिल होने के कारण वे मेरी काबिलियत पर शक करने लगे थे। मुझे उनकी इन बातों का बहुत बुरा लगा। अगर आपके बारे में कोई पहले से ही सोच ले कि आप उस काम को नहीं कर पाएंगी, जिसके लिए आप इतनी मेहनत कर रही हैं तो इससे आपका मनोबल नीचे हो जाता है। स्वप्ना ने कहा कि अपने दोस्तों की बातें सुनकर उन्हें भी लगने लगा कि उनका इंडोनेशिया जाना बेकार है। बकौल स्वप्ना, मुझे लगा कि मैं घर चली जाऊं क्योंकि दोस्तों की बातों को सुनकर मैं बहुत रोई थी। जब उन्होंने मेरे बारे में ये सब बातें बोलीं तब से मैं एक-एक दिन और एक-एक रात बहुत रोई। लेकिन मेरे सर (कोच) ने कहा कि स्वप्ना तू मेरे ऊपर विश्वास कर। तुम पदक जीतकर आओगी। स्वप्ना ने कहा कि लम्बी कूद उनकी पसंदीदा स्पर्धा थी लेकिन वे इसमें ज्यादा सफल नहीं हो पाईं। हालांकि उन्होंने भाला फेंक अच्छा करने पर खुशी जताई। यह पूछे जाने पर कि जब एक स्पर्धा में आप अच्छा नहीं कर पातीं हैं तो दूसरी स्पर्धा के लिए खुद को कैसे तैयार करती हैं? उन्होंने कहा कि बस यही सोचती हूं कि एक में अच्छा नहीं किया तो क्या हुआ अभी तो छह बाकी हैं। अगले में अच्छा कर सकती हूं। पहले वाले को भूलकर अगले पर ध्यान देती हूं। मैंने जकार्ता में वैसा ही किया। मैं पहले दिन पिछड़ गई थी। लेकिन मैंने सोचा कि कोई बात नहीं अभी तीन स्पर्धा बाकी है। देखते हैं आगे क्या होता है। यह पूछे जाने पर कि 800 मीटर से कभी आपकी पसंदीदा नहीं रही और फिर कैसे इसमें अच्छा किया, स्वप्ना ने कहा, मैंने बस यह सोच कर इसमें भाग लिया था कि मुझे चीन की लडक़ी के साथ मुकाबला करना है। अगर वह पहले नंबर पर रही तो मैं भी रहूंगी और अगर वह चौथे नंबर पर रही है तो मैं भी चौथे नंबर पर रहूंगी। कुछ भी हो जाए मुझे उसके साथ रेस समाप्त करनी है।
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