शिया गुरु का फतवा, मंदिर के लिए मस्जिद की जमीन नहीं दी जा सकती

कानपुर। शिया समुदाय के सर्वोच्च धार्मिक गुरु आयातुल्लाह अल सिस्तानी ने इराक से ई-मेल पर एक फतवा भेजा है। इस फतवे में कहा गया है कि मुस्लिम वक्फ संपत्ति को मंदिर या किसी अन्य धार्मिक स्थल बनाने के उपयोग में नहीं दिया जा सकता है।उत्तर प्रदेश के कानपुर में रहने वाले मजहर अब्बास नकवी ने बताया कि शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी सुप्रीम कोर्ट में अपनी याचिका वापस लेकर और बोर्ड से इस्तीफा दें।प्रस्ताव के विरोध में गत दिनों कानपुर में इस्लामिक विद्वान मजहर अब्बास नकवी ने इराक में शिया समुदाय के सर्वोच्च धार्मिक गुरु आयातुल्लाह अल सय्यद अली अल हुसैनी अल सिस्तानी से ई-मेल पर इस विषय पर मार्गदर्शन चाहा था कि क्या कोई मुस्लिम वक्फ बोर्ड की जमीन को मंदिर या किसी अन्य धार्मिक स्थल के निर्माण के लिए दिया जा सकता है।इसके जवाब में अल सिस्तानी ने फतवा भेजा है कि इसकी अनुमति नहीं दी जा सकती है। नकवी ने कहा कि जहां मस्जिद बनाई जाती है, वह जमीन अल्लाह की संपत्ति हो जाती है। इसे किसी दूसरे को नहीं दिया जा सकता है। वसीम रिजवी को तुरंत अपनी याचिका सुप्रीम कोर्ट से वापस ले लेनी चाहिए। साथ ही कहा है कि वह वक्फ बोर्ड से इस्तीफा देकर सभी से माफी मांगे। यदि वे ऐसे नहीं करते हैं तो उन्हें इस्लाम से खारिज दिया जाएगा। नकवी ने कहा है कि अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का कोई भी फैसला हमें स्वीकार होगा। इस फतवे की एक एक कॉपी सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार को भेजा जाएगा और उनसे अनुरोध किया जाएगा कि यह बात भी सुनी जाए।इस फतवे के मामले में शिया वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष वसीम रिजवी ने बताया कि यह फतवा गुमराह करके जारी कराया गया है। वे केवल यह पूछते कि मस्जिद की जगह किसी को दी जा सकती है तो बेशक उनका जवाब वही होगा जो उन्होंने किया है। उल्लेख है कि नवंबर-2017 में उत्तर प्रदेश के शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी ने सुप्रीम कोर्ट में एक प्रस्ताव दिया था कि अयोध्या में वक्फ संपत्ति के लिए रूप में दर्ज विवादित जमीन मंदिर के लिए दे दी जाए। इसके एवज में लखनऊ में मस्जिद-ए-अमन का निर्माण करवाया जाए।
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